नारी की पुकार....

बन्द करो अत्याचार।

एक औरत करे पुकार
बंद करो ये अत्याचार
कौन है ऊंचा
कौन है नीचा
तुलना ना हो बारम्बार
बंद करो ये अत्याचार।।।

क्यों घुट घुट कर वो मरती है
क्यों बाहर लोगो से डरती है
अब मत  करो ये व्यभिचार
बंद करो ये अत्याचार।।

मंदिर में जो है अनमोल
क्यों बाहर न उसका कोई मोल

है  ये उसका भी घर दुआर
बंद करो ये अत्याचार।

मासूमो को भी ना बख्से
है ये कैसा आज का इंसान
हर तरफ ये हाहाकार
बंद करो ये अत्याचार ।।

जब भेद ये मिट जाएगा
तब दिल सुकून पाएगा
ना हो कहीं भी चीत्कार
बंद करो ये अत्याचार
एक औरत बस करे यही पुकार।।

मीनाक्षी शर्मा( ग्वालियर)

टिप्पणियाँ