क्या भाजपा के दिन लद गए!
महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भाजपा के हाथ से सत्ता चली गई और उसकी ही सहयोगी पार्टी शिवसेना ने भाजपा के विरोधियों से हाथ मिलाकर सत्ता पर काबिज हो गई.....कभी जो भाजपा ने दूसरों के साथ किया अबकि बार वो उसके साथ हो गया।
कल अर्थात 28नवम्बर को एक साथ दो दर्द भाजपा को सहने पड़े...महाराष्ट्र में छोटा भाई बाप बन रहा था अर्थात सत्ता पर काबिज हो रहा था तो दूसरी तरफ बंगाल उपचुनाव की तीनों सीट तृणमूल के खेमे में चली गई अर्थात बंगाल से भी भाजपा के लिए खबर सुखद नहीं थी।
2017 से 2019 के इस सफर में भाजपा का भगवा रंग कितना रह गया यह अगर नक्शे से आकलन किया जाए तो भाजपा 71प्रतिशत के ग्राफ से करीब 40प्रतिशत तक आ गई है। हरियाणा ताल मेल से बचा लिया गया वरना आंकड़ा और नीचे उतर जाता।
अब यह सवाल लोग पूछ रहे है कि कहीं भाजपा के दिन तो नहीं चले गए.....जब पास पड़ी थाली आपकी आपके सामने से कोई और आराम से ले जाए और आप कुछ न कर सके इसका मतलब अभी समय आपके साथ नहीं है इसलिए निर्णय गलत पर गलत हो रहे है और उनका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
जब उद्धव ठाकरे के सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया तब अमित शाह अगर उद्धव की गलतियां गिनाए तब इससे क्या लाभ!अगले ने सरकार बना ली और आप इस मुगालते में रहे कि सरकार तो हमारी ही बनेगी!कभी आपके नेताओ का अहम दगा दे रहा है तो कभी अपनी हस्ती का वहम दगा दे रहा है कभी अदूरदर्शी निर्णय दगा दे रहे है अर्थात आपका अति आत्मविश्वास ही आपको छल रहा है।
एक महाराष्ट्र या फिर बंगाल उपचुनाव में हार से आपको हारा हुआ नहीं माना जा सकता पर आपके नेताओ के व्यवहार व बर्ताव से सकारात्मक अनुमान लग नहीं रहे शायद इसलिए यह लग रहा है कि जहां रोशनी का आशियाना था वहां अब अंधेरे घर करते दिखाई दे रहे है और तब लगता है कि वक़्त कहीं पलट तो नहीं रहा।
महाराष्ट्र में शिव सेना के विश्वास घात पर राजनीतिक दूरदर्शिता की कमी दिखी और बंगाल में तो भाजपा के पास कोई नेता ही नहीं दिख रहा.....बड़बोले नेताओ के जमघट से चुनावी समर नहीं जीता जा सकता।
खड़गपुर में दिलीप घोष का प्रभाव नहीं चला क्योंकि उनके कार्यकाल से वहां के लोग खुश नहीं थे....जो सीट भाजपा की थी वो भी भाजपा नहीं बचा सकी।चुनाव परिणाम से पहले कैलाश विजयवर्गीय का अहम बोलता दिखा उनके बयानों में...जैसे विजय की तश्तरी उनके सामने रखी है।चुनाव परिणाम के बाद उनको बूथ लूट याद आ गई।आप पहले निर्णय तो कीजिए कि आपको बोलना क्या है।प्रभारी होने के बाद भी आप हकीकत की नब्ज अब तक पकड़ नहीं पाए और बयानो में शुरुआती बचाव के तीर का आप प्रयोग नहीं करते।बंगाल में ममता को फ्री हैंड भाजपा के बड़बोले नेताओ से ही मिलेगा....बंगाल में भाजपा को भाजपा के बड़बोले ही डूबाएंगे।
चमत्कारिक नेतृत्व का साफ अभाव बंगाल भाजपा में दिख रहा है और हस्ती से ज्यादा गुमान लोगो को खल रहा है।लोकसभा परिणाम के माहौल से बहुत दूर जा चुकी है भाजपा। अब 2021भाजपा के लिए आसान नहीं है।
- संजय सनम72780-27381
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