*हरितालिका तीज 2 सितंबर को ही क्यो!
इस वर्ष हरितालिका तीज को लेकर पंचांगों के भेद से विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है क्योंकि देश के कुछ पंचांगों में 1 सितंबर को तृतीया का क्षय है तो कुछ पंचांगों में तृतीया का मान 2 तारीख को भी है। काशी द्वारा निर्मित प्रायः सभी पंचांगों में तृतीया का मान 2 सितंबर को 9:01 बजे तक दिया गया है। जिन पंचांगों में तृतीया तिथि का क्षय है वे नॉटिकल अलमानेक के द्वारा बनाए गए दृश्य पंचांग हैं जबकि पारंपरिक रीति से निर्मित पंचांगों में तृतीया का मान 2 सितंबर को 9:01 तक है। काशी से प्रकाशित सभी पंचांगों में तृतीया तिथि का मान 2 सितंबर को 9:01 बजे तक होने से 2 सितंबर 2019 को ही हरितालिका तीज मनाई जनी चाहिए क्योंकि निर्णय सिंधु में यह स्पष्ट वर्णित है कि *मुहूर्तमात्र सत्वेपि दिने गौरी व्रतं परे* पुनश्च *चतुर्थी सहिता या तु सा तृतीया फलप्रदा। अवैधव्यकर स्त्रीणां पुत्र-पौत्रप्रवर्धिनी।।* लिखते हुए धर्मशास्त्र के ग्रंथों में द्वितीया युक्त तृतीया का प्रतिकार भी किया गया है इसलिए हम सब के लिए 2 सितंबर 2019 को ही हरितालिका तीज रखना शास्त्र सम्मत होगा। तीज 2 को मानना ही शास्त्र सम्मत है*
- नीलम वंदना
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