सोचा कुछ- हुआ कुछ।
16 अगस्त को जोधपुर पहुंचा था करीब 4 दिन के मुलाकाती कार्यक्रमों के साथ।पर जोधपुर पहुंचते ही मौसम का रंग-सड़कों पर जाम पानी,जनजीवन अस्तव्यस्त देख कर मुझे एहसास तुरंत हो गया कि जोधपुर अभी रुकने का अर्थ समय व्यर्थ करना होगा।17 अगस्त को जन्म दिन के दिन मेरी इष्ट अधिष्ठात्री श्री सच्चियाय माता ओसियां में हाजरी देने के उद्देश्य से जोधपुर आया था पर पानी के प्रवाह व बहाव की खबरे सुनकर यह डर लगने लगा कि कही बिना हाजरी दिए जाना नही पड़ जाए और मन ही मन माँ से यह अर्ज कर रहा था कि हाजरी की अनुमति दीजिये और राह प्रशस्त कीजिये।उसने सुन ली और लगातार चल रही बारिश जब रुकती लगी तो 16 को ही मैंने माता के दरबार मे हाजिर होने का निर्णय कर चल पड़ा।सड़क,परिवहन औऱ मुख्य रास्तों में जल प्रवाह को देख कर डर रहा था कि दर्शन हो पाएंगे या नही।
ओसियां की बस जब बढ़ रही थी और जल प्रवाह की वजह से रुक रुक कर चल रही थी तब मन मे एक अजीब सा माहौल था और जब मथानिया औऱ उम्मेदनगर के माहौल को देखा तो अंदर तक सिहर गया।अब मुझे इस बात की आशंका थी कि हाजरी देने के बाद वापसी के वक्त कही परिवहन व्यवस्था इस स्थिति को देख कर बन्द न हो जाये।
माता की कृपा थी कि उसने मन की आशंका को खत्म किया--वापसी के वक्त बस मिल गयी पर पानी के बीच से गुजरते वक्त मन मे डर हर यात्री के मन मे था क्योकि बीच रास्ते मे पुल भी टूट गया था- सड़क और तालाब के बीच का फर्क भी खत्म हो गया था।छोटे वाहन इस पानी मे जगह जगह फंसे हुए दिखे थे -बड़े वाहन जैसे तैसे निकल रहे थे पर सफर जोखिम भरा ही था।
पहली बार पानी को इस रूप में देख कर विकट हालात समझ मे आये और मेरा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम तुरंत बदल गया क्योकि माता के दरबार में हाजरी दर्ज हो जाने से मन मे एक सुकून भी था।17 अगस्त को मैं शाम तक तपस्वी साधक मुनि श्री जय कुमार जी के सान्निध्य में सुजानगढ़ आ गया था अर्थात जन्म दिन की पूर्व संध्या माता का आशीर्वाद औऱ जन्म दिन पर तपस्वी,साधक मुनि श्री जय मुनि जी का आशीर्वाद का संयोग इस बदले कार्यक्रम की वजह से हो गया --17 का यह दिन खास हो गया।जब दिल्ली के लिए रवाना हुआ तो पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के रद्द होने का गम खत्म हो गया था क्योकि जो मिला वो कम नही था। यहां पर स्नेही व ज्योतिष मर्मज्ञ श्री सुमेरमल सिंघी जी का भी मिलना मन को अतिरिक्त सुकून दे गया।
किस तरह से पल भर में निर्धारित कार्यक्रम तुरंत पलट जाते है और जो नही सोचा होता वो हो जाता है।
कुछ खास दोस्तो से जोधपुर जा कर भी नही मिल पाने का दर्द तो जरूर है पर व्यवसायिक गतिविधियों पर आई बाधा ने माता के आशीर्वाद को बाधित नही किया और तपस्वी साधक मुनि श्री जय कुमार जी का सान्निध्य भरपूर दे दिया।
जोधपुर का यह दौरा माता की ममत्व से पूर्ण अता व तपस्वी मुनि श्री जय कुमार जी की स्नेहिल कृपा के नाम हो गया।
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