अपनी जन्म कुंडली से जानिए--दौलत कब बरसने वाली है

धन प्राप्ति कब! आपकीं जन्म कुंडली बताएगी

व्यक्ति का जीवन उसकी तकदीर पर ही टिका है क्योकि कर्म का फल भी अक्सर उस वक्त नही मिलता जब व्यक्ति किसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कर्म करता है पर उसके प्रारब्ध की गणित अर्थात फ़ाइल पाप कर्मों की खुली होती है तब वर्तमान के कर्म भी सफलता तक नहीं पहुंचा पाते।इसलिए जिंदगी में सुख, समृद्धि ,सफलता के लिए आपके प्रारब्ध की फ़ाइल अर्थात तकदीर,किस्मत मजबूत होनी चाहिए।
आज इस आलेख में हम जन्म कुंडली के आधार पर धन कहाँ से कब और कैसे आता है उसकी सामान्य चर्चा करेंगे। आपके जन्म समय मे आपकीं जन्म कुंडली मे उपस्थित ग्रह आपकीं किस्मत को बताते है और किस्मत के रूप भी व्यक्ति के लिए अलग अलग होते है--धन किस्मत,फेम किस्मत, कुटुंब किस्मत प्रोपर्टी किस्मत, हेल्थ किस्मत ये सब अलग अलग रूप होते है।आपने देखा होगा किसी व्यक्ति के पास धन तो अपार है पर उसके नाम से उसका मकान नही है जबकि धन इतना है कि वो चाहे तो कई बड़ी प्रोपर्टी खरीद सकता है। फिर वजह क्या है कि इतना धनवान होने के बाद भी उस व्यक्ति के नाम से एक घर तक नही है--जवाब स्पष्ठ है कि उस व्यक्ति के जन्मांग चक्र में वेल्थ की किस्मत तो है अर्थात 2,6,10,11 नंबर के भाव तो एक्टिव है पर 4 नंबर अर्थात जमीन के भाव मे परेशानी है इसलिए जब भी यह व्यक्ति अपने नाम से कोई जमीन लेने की सोचता है तब कोई न कोई बाधा ऐसी आती है कि उसको इस राह से हटना पड़ता है।

Gyan app.in

कुछ इसी प्रकार कुछ व्यक्ति के पास धन तो होता है पर उनके नाम से एक भी गाड़ी नहो होती जबकि परिवार के अन्य सदस्यों के नाम से कई गाड़िया होती है- यहां पर भी 4 अर्थात चतुर्थ भाव की गणित कही न कही बाधक हो जाती है।
अब आइये धन जो कि आज के भौतिक युग की सबसे बड़ी मांग है उस पर विचार करते है।धन के लिए जन्मांग चक्र में मुख्य 2,6,10,11 भाव होते है -अब धन आएगा कब--इसके लिए हमको उस व्यक्ति विशेष के जन्मांग चक्र में उन ग्रहों को देखना होगा जो भाव ओर नक्षत्र,उप नक्षत्र से इन भावों से जुड़े रहते है अर्थात जो ग्रह अपने नक्षत्र मालिक व उप नक्षत्र से इन भावों का प्रतिनिधित्व करे और 5,8,12 भाव से उनका सम्बन्ध न हो तो फिर उन ग्रहों की महादशा,अंतर,प्रत्यंतर में इतना धन आता है कि उस व्यक्ति को भी यह पता नही चलता कि अब उसको वो सेट कहाँ करे। अर्थात तब छप्पर फाड़ कर आता है कि गिनते गिनते आदमी थक ,जाता है।
अब अगर धन के सकरात्मक भावों के साथ नकारात्मक अर्थात हानि,व्यय के भाव भी एक्टिवेट हो अर्थात उन भावों के प्रतिनिधि ग्रहों की दशा, भुक्ति अंतरा चलता हो तब धन आता तो है पर मानसिक संघर्ष, उथल पुथल के बाद औऱ वो टिकता भी नही है।
आपको धन कब मिल सकता है-?--अगर आपकी जन्म कुंडली मे उस ग्रह की महादशा चल पड़ी हो जो ग्रह 2,6,10,11 में से कम से कम 2 या 3 भाव का प्रतिनिधित्व कर रहा हो तथा इसको टोकने वाले ग्रह यहां न हो तो फिर यह आपके लिए धन कमाने का समय है।अगर आपका दूसरा और एकादशं भाव एक्टिव है तो आपके रोजगार में प्रतिदिन की आमदनी उस दशा के एक्टिव होने से ही बढ़ जाएगी- अगर आपका रिटेल शो रूम या दुकान है तो आपके ग्राहकों की तादाद बढ़ जाएगी।अगर 10 वे भाव के कसपल सबलोर्ड की गणित में चर राशि है तो फिर कस्टमर इतने बढेंगे अर्थात उनका आवागमन इतना होगा कि आपको अपने लिए समय निकालना मुश्किल हो जाएगा

Daillyhunt

अगर वो स्थिर राशि है तब कस्टमरों की यह भीड़ नही रहेगी पर धन फिर भी आएगा और वो एक या 2 कस्र्टमर की डीलिंग से ही हो जाएगा इसलिए यह बात एकदम साफ है कि धन के आने के लिए मुख्य रूप से 2,6,10 व मनोकामना पूर्ति का भाव 11 जुड़ने से सोने में सुहागा हो जाता है।
इस दूसरे भाव के साथ अगर तीसरा जुड़ता है तो आपको धनलाभ छोटी यात्राओं से होना है आप एक जगह बैठ कर नही कमा सकते -आपको छोटी यात्राओं से ही धन प्राप्ति के संयोग बनेंगे। अगर आप एजेंसी,कमीशन का कार्य करते है तो यह आपके लिए लाभदायक होगा- अगर आप सरकारी गेर सरकारी कागजात तैयार करवाने की सर्विस देते है तब यहां से आपके धन लाभ के स्रोत बनेंगे। आपके छोटे भाई बहन से आपको लाभ हो सकता है उनकी सहायता से आप आगे बढ़ सकते है।आपके पड़ोसियों से इस अवधि में लाभ हो सकता है अर्थात वे मददगार हो सकते है।
जब भी दूसरा भाव जो कि धन का एक प्रमुख भाव है यह एक्टिवेट होता है तो कुटुंब का सहयोग या वहां से धन प्राप्ति का संयोग बनता है- दूसरा भाव आपकीं वाणी का है अर्थात जो लोग आवाज,बोलने के प्रोफेशन से जुड़े होंगे जैसे गायक,मंच संचालक,मोटिवेशनल स्पीच देने वाले,धर्म कथा करने वाले, यु ट्यूबर, कवि तथा इसी तरह से अन्य क्षेत्रों के वे सभी जो मंचीय गतिविधि से जुड़े है उनके जीवन मे तब धन की वर्षा होने लगती है।स्वतः ही एक के बाद एक कार्यक्रम मिलने लग जाते है इसलिए दूसरे भाव का महत्व आवाज से धन कमाने में जुड़ जाता है


Dainik savera times
दूसरा भाव चतुर्थ भाव का एकादशं होता है अगर आपके जन्मांग चक्र में चतुर्थ से दूसरे का सुखद जुड़ाव हो तो फिर चतुर्थ भाव से धन लाभ के स्रोत खुल जाते है-चतुर्थ भाव स्कूल शिक्षा का होता है अर्थात स्कूल शिक्षण संस्थान से आपके लिए धन की राह शुरू हो सकती है।चतुर्थ भाव जमीन का है आप प्रोपर्टी के व्यवसाय से लाभ कमा सकते है यह भाव माता का प्रतिनिधित्व करता है अर्थात मातृ धन लाभ भी बताता है।
गाड़ियों से लाभ या उनका व्यवसाय का कारक यह हो सकता है। इन सब भावों में लग्न अर्थात प्रथम भाव का जुड़ाव तो रहना ही है क्योकि प्रथम भाव मे आपका शरीर,आपका व्यक्तित्व अर्थात आप है जो कुछ मिलना है वो प्रथम भाव अर्थात आपको मिलना है इसलिए प्रथम भाव का जुड़ाव अगर 11 से है तो फिर आपको जीवन मे धन लाभ सहजता से होगा और संतोषजनक रूप से होगा पर 8 व 12 से जुड़ाव है तो फिर दुर्घटना,अस्पताल,जेल,, विदेश बताता है।अगर 8 के साथ 12 न होकर 11 है तो फिर दुसरो का धन आना अर्थात बिना कमाए धन की प्राप्ति जो लॉटरी भी हो सकती है।

टिप्पणियाँ