नेताओं के दौरे से अस्पताल प्रशासन परेशान
बिहार में चमकी बुखार का मासूम बच्चो पर कहर अब भी जारी है और मौत का आंकड़ा बढ़ता हुआ 150 के पार चला गया है।जहां एक तरफ जनता अपने मासूमों की जिंदगी को खतरे में देख कर परेशान है वहां अस्पताल व डॉक्टर्स बार बार नेताओ के दौरे से हैरान है -नेता जिस तरह से अपने समर्थकों की बारात लेकर आते है उससे मरीजों के इलाज में बाधा उतपन्न हो रही है।
नेताओ के दौरे से अस्पताल प्रशासन व सम्बंधित डाक्टर्स को नेताओ के साथ रहना पड़ता है जिससे जो वक्त मरीजों को मिलना चाहिए वो वक्त बेवजह नेता खा जाते है पर राजनीति भला मौत की पिच पर वोटों की गणित आरोप - प्रत्यारोप के स्ट्रोक से लगाने से कब चूकती है?

जब डॉक्टर्स,अस्पताल प्रशासन बार बार नेताओ के दौरे बन्द करने की अपील कर रहे है तब भी शरद यादव जैसे लोग अपने साथ 30 समर्थकों के साथ अस्पताल परिसर का परीक्षण करते है जबकि वो न तो इस क्षेत्र के सांसद,न विधायक है पर राजनीति जो चमकानी है इसलिए मौत की वेदना पर भी न्यूज़ में आने व इस बहाने सरकार पर आरोप लगाने का अवसर ये लोग नही खोना चाहते।
अस्पताल के दौरे पर क्षेत्रिय विधायक,सांसद, स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री का दौरा तो वाजिब है क्योकि वे स्थिति को देख कर उचित निर्णय लेने के अधिकारी है पर शरद यादव व उन जैसे अन्य लोगों के आने से कोई राहत नही मिलती बल्कि व्यवधान पैदा होता है।

गौरतलब है कि अभी भी 500 बच्चे इस बुखार से पीड़ित है तथा यह बुखार बिहार के अन्य कुछ जिलों में भी दस्तक दे रहा है बेतिया,सिवान,भोजपुर,बेगूसराय भागलपुर से भी बच्चो के मौत की खबर चिंता को बढ़ा रही है। इस बुखार के होने की एक वजह अधपके लीची का सेवन बताया जा रहा है जो बच्चे अक्सर खा लेते है।
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