किस्मत अर्थात हमारा प्रारब्ध-पिछले कर्मो के तलपट की फाइल्स जब जिस फ़ाइल का नंबर आता है तब उस फ़ाइल के कर्म के आधार पर हमें अपने जीवन मे फल मिलता है- कई बार लोग वर्तमान के कर्मो के आधार पर किस्मत से शिकायत करने लगते है।
जैसे कोई इस जन्म में बहुत शानदार नैतिक रूप से अपना जीवन जी रहा है अर्थात उसके कर्मो में पुण्य ही पुण्य है क्योकि वो पाप तो मन,वचन,कर्म से कर ही नही रहा फिर भी जब उसके जीवन मे अभाव,असफलता,रुकावट मिलती है तो न सिर्फ वह बल्कि उसको जानने वाले अन्य लोग भी उसकी किस्मत से यह कह कर शिकायत करने लगते है कि इतना गुणी, आचारवान,साधु स्वभाव व्यक्ति जो किसी के लिए बुरा नही सोचता पर देखिए उसके जीवन मे कितने कष्ट आ रहे है
-अर्थात जिसके सारे कर्म इस जीवन के परोपकारी,नैतिक है उस व्यक्ति के पुण्य कर्मों के बाद भी उसको अभाव संघर्ष में जीवन जीना पड़ रहा है- किस्मत भी उसके साथ खेल कर रही है--क्यों?
ऐसे एक नही अनेकों उदाहरण सवाल बन कर खड़े होते है-कुछ लोग जो नैतिक नही है-अपने रसूख से दूसरों का धन, अधिकार दबा लेते है अर्थात एक के बाद एक अनैतिक कर्म करते है और उसके बावजूद किस्मत उनके साथ चलती है और वे बेशुमार दौलत, वैभव,सुख संपदा के मालिक होते है उनके आगे पीछे लोगों का हुजूम चलता है और वे जिंदगी का हर सुख भोगते है--अर्थात पाप कर्म करने के बाद भी पुण्य कर्मों सा फल या सुख आखिर क्यों?
जब हम कहते है कि पुण्य कर्मों का फल शुभ व सुखद तथा गलत अर्थात पाप कर्मों का फल अशुभ व दुःखद मिलता है तब तो पहले उदाहरण में सात्विक,नैतिक व्यक्ति को जीवन के समस्त सुख व दूसरे उदाहरण के अनैतिक, दुष्ट वृत्ति वाले व्यक्ति को परेशानी मिलनी चाहिए थी पर उल्टा क्यो हो रहा है?
प्रिय पाठक
ईश्वर के कर्मफल के सिद्धांत में कही कोई उलटफेर नही है और न ही ईश्वर के उस कम्प्यूटर के डेटा को कोई हैक कर सकता है या बदल सकता है - एक एक कर्म की फाइल क्रमबद्ध चलती है और जब तक वो चलती है तब तक उस फ़ाइल के कर्मो के फल ही उस वक्त आपको मिलते है अर्थात आप इस जीवन मे बहुत अच्छा कर रहे हो फिर भी आपको अच्छा फल नही मिल रहा तो इसका अर्थ यह नही कि आपके वर्तमान के कर्म किसी ने हैक करके बदल दिए है बल्कि वास्तविकता यह है कि अभी जिन कर्मो की प्रारब्ध की फ़ाइल खुली हुई है या चल रही है उस फ़ाइल में आपके पाप कर्मों की तलपट है जिसकी वजह से आपको अभी परेशानी,संघर्ष,अभाव से उसका भुगतान करना पड़ रहा है ।
जब इस फ़ाइल के कर्म पूरे भुगतान हो जायेगे उसके बाद क्रमशः फिर जो फ़ाइल आएगी उस हिसाब से उसका भुगतान उसकी तलपट के आधार पर अच्छा या बुरा होगा।अभी वर्तमान में जो आपके अच्छे कर्म है उसकी फ़ाइल के कर्मो के भुगतान का नबर जब आएगा तब ये पुण्य कर्म आपको उस वक्त सारे सुख प्रदान करेंगे अगर उस वक्त आप गलत कर्म भी करेंगे तब भी आपको सुखद परिणाम मिलेंगे क्योकि आपके पुण्य कर्मों की फाइल के भुगतान का वक्त चल रहा होगा।
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कुल मिलाकर बात साफ है कि हमको हमारे हर कर्म का भुगतान निश्चित है वह हमारे अच्छे व बुरे कर्मो के आधार पर उसका फल हमे भुगतना पड़ेगा- कर्मो की यह फाइल्स भी अपने क्रम से आती है और हमसे उसका भुगतान कभी वसूलती है तो कभी ईनाम देती है--इसलिए वर्तमान के कर्मो का फल तुरंत नही मिलता क्योकि प्रारब्ध प्रभावी होता है इसलिए अच्छे कर्म करने वाले अगर प्रतिकूल परिणाम पा रहे है तो यह प्रारब्ध की किसी पुरानी फ़ाइल का भुगतान है आपके वर्तमान कर्मो की फाइल सुरक्षित है।
ईश्वर का कर्मफल का यह सिद्धांत आपको अच्छे कर्म करने की सीख देता है जो बोएँगे वो ही काटेंगे- जो देंगे वो ही मिलेगा इसलिए मन, वचन क्रिया से अच्छे कर्म ही किये जायें ताकि आने वाले जीवन के लिए आज का वर्तमान जब प्रारब्ध बन कर आये तो शुभम,सुखद,सफल हो।
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सादर- संजय सनम( ज्योतिष परामर्शक)
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