रेव पार्टियों की कड़वी हकीकत--

रेव पार्टियों  के  शिंकजे में युवा पीढ़ी

रेव पार्टी का प्रचलन दिनों दिन बढ़ता जा रहा है और युवा वर्ग पहले नाच गाने की पार्टी से आकर्षित होता है फिर नशे की लत और काम वासना को शांत करने की स्वछंद जगह और माहौल मिल जाता है क्योकि रेव पार्टियों में लड़कों से अधिक लड़कियां रहती है जो युवा लड़कों को इन पार्टियों में जाने की मानसिकता बना ही देती है और एक बार कोई इस पार्टी या इस रंगीन खुले माहौल में चला जाये फिर उसका इस दुनियां से लौटना मुश्किल होता है क्योकि ड्रग्स का नशा शरीर को यहां रहने के लिए मजबूर करता है तो मन के लिए यहां भरपूर सेक्स मिलता है।
रेव पार्टी शराब,शबाब,ड्रग्स,,संगीत, डांस,सेक्स का एक तरह से कॉकटेल होता है और दिल्ली,मुम्बई,पुणे ,पुष्कर,खंडाला,इनके गढ़ माने जाते है -ये पार्टियां इतनी गुपचुप तरीके से होती है कि सिर्फ उनको ही पता रहता है जो इससे जुड़े रहते है - नए लोग जो जुड़ते है वे पुराने की संगत में किसी तरह आये हुए होते है तभी उनको एंट्री मिल जाती है।वैसे भी ये पार्टियां रईसों की अर्थात दौलत वालों की होती है अर्थात रईस खानदान के बच्चे ही इनका खर्च उठा सकते है क्योकि ड्रग्स की बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है तथा इसी वजह से ड्रग्स का कारोबार करने वालो के लिए ये रेव पार्टियां मंडी से कम नही होती क्योकि यहां उनके उत्पाद बड़े मुनाफे के साथ बिकते है तथा इनके ग्राहक नशेड़ी बन कर फिर खुद इनको खोजते है।
रात के अंधेरों और सुनसान जगह गुपचुप तरीके से आयोजित होने वाली इन पार्टियों में साधारण लोगों के लिए कोई जगह नही है-धनकुबेर के बच्चों के लिए धन लुटाकर सेक्स की मनचाही मुराद पूरी करने का यह तीर्थ स्थल सा बन गया है।
इन पार्टियों में 2 तरह के गैरकानूनी ड्रग्स चलते है एसिड और एक्सटेसी और इनको लेने के बाद फिर लगातार 8 से 10 घण्टे तक नाचने की क्षमता आ जाती है ये ड्रग्स इन युवाओं में लगातार नाचने का जुनून पैदा करता है जो धनाढ्य होते है उनके लिए ये 2 ड्रग्स खास होते है पर जिनके पास उतना पैसा नही होता वे हशीश या गांजा से ही काम चलाते है।
बड़े बड़े फार्म हाउस को किराए पर लेकर चलने वाली इन पार्टियों की एंट्री फीस भी 10- 15- 20 हजार तक होती है तथा मिनरल वाटर से लेकर परोसे जाने वाली शराब व अन्य खाने की वस्तुओं की कीमत भी कई गुना ऊपर होती है पर शराब,के साथ शबाब को हासिल करने आये युवा ये सारी कीमत चुकाते है।कई बार पुलिस के छापेमारी,गिरप्तारी,जेल, जमानत,बदनामी सब हो जाती है पर यह नशा फिर भी कायम रहता है।
इन पार्टियों में 20- 30- 60 हजार वाट का कानफोड़ू म्यूजिक सुपर फास्ट बजता है और इस तेज संगीत के साथ नशे का मिश्रण घुलकर सारे बंधन तोड़ देता है और मनुष्य अपने आदिम स्वरूप में आ जाता है ऐसी स्थिति में आने पर आगे की व्यवस्था भी यहां मिलती है।आजकल रेव वेन्यू पर उसके लिए हट बनने लगे है यहां सेक्स की पूरी सुविधा उपलब्ध रहती है।
कुल मिलाकर ये रेव पार्टियां देश के युवाओं के तन,मन, धन की नीलामी,बर्बादी कर रही है- क्षणिक सुख के लिए युवा अपने जीवन को मस्ती ही मस्ती में बर्बाद कर रहे है।

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