बंगाल के हालात सवाल पूछते है
क्या बंगाल को किसी की बुरी नजर लग गई है या फिर सोच ही बुरी बन गई है--चुनाव के समय से शुरू हुई यह विषैली हवा रुकने का नाम ही नही ले रही--जय श्री राम पर पलटवार का यह प्रकोप तो नही--एक के बाद एक घटित घटना बहुत कुछ सोचने को मजबूर क्या नही करती।
राजनीतिक हिंसा की आग में जला बशीरहाट का सन्देशखाली का क्षेत्र, उसके बाद कोलकाता के एन आर एस में जूनियर डॉक्टर के साथ मारपीट की घटना न सिर्फ बंगाल बल्कि उसकी गूंज देश के अन्य हिस्सों में भी फेल गई- जूनियर डॉक्टर अपनी जान की सुरक्षा व सम्मान के लिए हड़ताल पर चले गए और सीनियर डॉक्टर भी उनके समर्थन पर उतर गए।
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राज्यपाल की अपील,ममता बनर्जी की अपील भी कुछ असर न कर सकी क्योकि डॉक्टरी पेशे के सम्मान के साथ सुरक्षित जीवन की यह लड़ाई है।भयमुक्त माहौल चाहिए डॉक्टर को अपना दायित्व निर्वहन के लिए और वो जब नही मिल रहा तब क्या करे डॉक्टर।उन बेचारे मरीजों का क्या गुनाह जो इलाज के अभाव में दर्द पा रहे है और कुछ तो जीवन से भी हार जा रहे है
तृणमूल नेता व मेयर फिरहाद हकीम की डॉक्टर सुपुत्री सबा करीम भी हड़ताली डॉक्टर्स के पक्ष में खड़ी नजर आ रही है- सोशल मीडिया में आई उनकी पोस्ट सबा करीम को वाह वाही दे रही है।सबा जो खुद एक डॉक्टर है इसलिए उनका बयान बहुत वजन रखता है-सबा ने लिखा है कि डॉक्टर्स के साथ जब अभद्रता हो रही थी तब पुलिस मूकदर्शक बन कर क्यो खड़ी थी--सबा ने यह भी कहा है कि वो खुद तृणमूल से जुड़ी है इसलिए इस मसले पर तृणमूल नेताओ का आगे न आना उसे अजीब लग रहा है।सबा ने डॉक्टर्स के इस आन्दोलन का समर्थन करते हुए कहा है कि यह आंदोलन डॉक्टर्स की सुरक्षा के लिए है।
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इधर अब यह आंच बैरकपुर महकमा के सागर दत्त मेडिकल कालेज तक पहुंच गई और वहां के 20 डॉक्टर्स ने अपनी सुरक्षा व बाहरी कहे जाने के विरोध में त्यागपत्र दे दिया है।हावड़ा में डॉक्टर्स ने विरोध स्वरूप काला बेज पहन कर रोगियों का इलाज किया।डॉक्टर्स से काम पर लौटने की अपील तेज हुई है पर डॉक्टर्स अपनी सुरक्षा को लेकर अड़े हुए है।
इधर मानवीय पक्ष बड़ा है तो उधर राजनीति जय श्री राम और हरि बोल पर घमासान करने पर तुली है खबर है कि कल हुगली जिले के आरामबाग के कालीपुर के नेताजी कालेज के सामने दाहसंस्कार कर लौट रहे लोग जय श्री राम और हरिबोल का नारा लगाते आ रहे थे तब वही पर कालीपुर के नेताजी कालेज में टी एम सी पी की एक विशेष बैठक हो रही थी तभी इस नारे को सुनकर बताया जाता है कि टी एम सी पी के नेता कार्यकर्ताओ ने दाह संस्कार से लौटते उन लोगों पर हमला कर दिया और जब यह खबर फैली तब भाजपा व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के समर्थक आगबबूला हो गए और उसके बाद उन लोगो ने टी एम सी पी के उन कार्यकर्ताओ पर जमकर हमला बोला तथा उनकी दौड़ा दौड़ा कर पिटाई कर दी बाद में पुलिस घटना स्थल पर उतरी और अब स्थिति नियंत्रण में है।
पर सवाल वही का वही है कि आखिर क्या हो गया बंगाल को कही सचमुच राम तो खफा नही हो गए--यह सवाल इसलिए है क्योकि ये हालात तब से ही बनते जा रहे है अगर राम का नाम लेने से कुछ भला हो जाये तो फिर लेने में क्या आपत्ति है--क्यो नही उनको भी यह दवा की तरह ही सही पर लेकर देखना तो चाहिए।
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