हारा इंगित- जीता लोकतंत्र

इंगित के फतवे पर लोकतंत्र की विजय।


सवाल हार- जीत का नही--सवाल तो लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का है,सवाल जनमत का है तथा जनता की कामना,भावना का है।

मैने पहले भी बार बार लिखा है कि आध्यात्मिक पथिकों को  सत्ता के अधिकार अपनी मर्जी से स्थान्तरित नही करने चाहिए या दूसरे  शब्दों में जनता पर थोपने नही चाहिए।

साधु संतों व आचार्य की भूमिका मर्यादा का,धर्म का मार्ग बताने की होनी चाहिए न कि सत्ता का मार्ग पकड़ाने की होनी चाहिए।

पर अफसोस यह जनभावना के सवालों के बाद भी चलता आया है जिसका जबाब सिरियारी ने लोकतंत्र की शक्ति से दिया पर उसकी प्रतिक्रिया निष्कासन से हुई जिसका गलत संदेश समूचे समाज मे हुआ।

अफसोस इस बात का है कि उसके बाद भी वो ही प्रक्रिया चलती गई और आज इसका जबाब हैदराबाद ने दे दिया और श्री सुरेंद्र सिंघी प्रचंड बहुमत से विजयी हुए अर्थात इंगित हारा और लोकतंत्र जीता।

यह भी संयोग है कि सिरियारी में भी  सुरेंद्र थे और यहाँ हैदराबाद में भी सुरेंद्र है।

मैं यह उम्मीद करता हूँ कि जो सिरियारी के सुरेंद्र के साथ हुआ उस गलती की पुनरावर्ती हैदराबाद के सुरेंद्र के साथ नही होगी।

सवाल प्रकाश बरडिया व सुरेन्द सिंघी का नही है।दोनों ही समाज के अपने है और यह हार भी प्रकाश बरडिया की  हार नही है बल्कि उस कूटनीति की हार है जो जनभावना के ऊपर तुगलकी फरमान थोपती है।

हमे अपनी गलतियों से सबक लेना चाहिए और सुधार करना चाहिए यह हमारे शास्त्र हमे सिखाते है पर दुख तब होता है जब हमारी गलती को कोई चुनोती देता है तब हम उसको अपनी प्रतिष्ठा का मुद्दा बना लेते है।

एक बार फिर दोहराना चाहूंगा कि किसी भी पक्ष को अपनी मर्यादा का अतिक्रमण नही करना चाहिए अर्थात आध्यात्मिक पथिकों को संस्थाओं के पद की पंचायती तुरंत प्रभाव से बन्द कर देनी चाहिए।जो काम समाज का है वो काम समाज को करने दे।जो काम साधु संतों का है वो काम साधु संत करे पर लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन न करे।

हैदराबाद में समाज के सभी लोगों को इस बात के लिए साधुवाद कि चुनाव की पूरी प्रक्रिया शांति पूर्वक लोकतांत्रिक रूप से सम्पन्न हुई।श्री प्रकाश बरडिया इसके लिए विशेष साधुवाद के पात्र है।

श्री सुरेंद्र सिंघी जी को जो प्रचंड जनमत मिला है उस बहुमत के सम्मान व स्वाभिमान की बड़ी जिम्मेदारी उन पर है।

मैं उनको ह्रदय से बधाई देता हुआ यह शुभकामना देता हूँ कि वो हैदराबाद समाज की भावनाओ का ख्याल रखते हुए आगे बढ़ेंगे।

मेरे किसी शब्द से अगर किसी के मन को आघात हुआ हो तो बिना शर्त खुले दिल से क्षमा याचना।

साभार।

संजय सनम

संपादक- फर्स्ट न्यूज़

कोलकाता

12/05/2019

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