लोकसभा चुनाव 2019 के सात चरणों का चुनाव जैसे ही 19 मई की शाम को सम्पन्न हुआ और लोगों की नजरें एग्जिट पोल पर लग गई कि सर्वेक्षण आखिर क्या कह रहे है! विपक्ष की तमाम ताकते टुकड़े टुकड़े ग्रुप से क्या मोदी का रास्ता रोक दे रही है।
चंद्र बाबू नायडू जिनकी अपनी जमीन आंध्र प्रदेश में खिसकती हुई नजर आ रही है वे विपक्ष की सरकार की जमीन तैयार करने में क्यो लगे है।क्या बुआ बबुआ की जोड़ी उत्तरप्रदेश में ही मोदी की गाड़ी को रोक देगीक्या ममता दीदी के केंद्र में विपक्ष की सरकार बनाने और कही न कही प्रधानमंत्री की दौड़ में खुद को आगे रखने के अरमान पूरे होंगे!
आखिर क्या बता रहे है तमाम सर्वेक्षण---
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अगर इन सर्वेक्षण के सारांश को देखे तो फिर भगवा हवा के झोंके आ रहे है अर्थात आ रही है फिर मोदी सरकार।
टूट रहे है नायडू,ममता के बड़े सपने--केजरीवाल से उनकी दिल्ली नही बच रही।ममता की अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही।राजस्थान,मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार का नशा इतनी जल्दी उतर गया । बुआ- बबुआ गठबंधन भी मोदी की आंधी को रोकने में कामयाब होता नही दिख रहा तब बात साफ है कि जनता मोदी को ही लाना चाहती है और इसके लिए धर्म जाति से ऊपर उठकर जनता ने मतदान किया है।अगर एग्जिट पोल के मुताबिक परिणाम आते है तो बात साफ है कि जनता ने अवसरवादी मेंढक सियासत को खारिज कर दिया जो बरसात का मौसम आते ही टर्र टर्र शुरू कर देते है।
इस चुनाव के परिणामो पर लोगो मे अजब कश्मकश थी--मन मे मोदी की लहर और बाहर टुकड़े टुकड़े गठबंधन जो हर कीमत पर मोदी को टोकने पर आमादा।एक दूसरे के जानी दुश्मन भी इस मुहिम में साथ थे-यह तो कहना ही पड़ेगा कि मोदी ने कई दुश्मनों को साथ साथ चलना सिखा दिया--इन सबका देश के लिए कोई ठोस घोषणापत्र नही था नक्योकि मुद्दा देश के विकास का नही बल्कि मोदी को हटाने का था -इनके पास यह भी तय नही कि मोदी की जगह बिठाएंगे किसे---दूल्हे का अता पता नही पर बारात तैयार कर बैठे--
राजनीति का यह हास्यास्पद पक्ष है या इन बेचारों की लाचारी--- मोदी फोबिया से पीड़ित इन सभी लोगो के लिए एग्जिट पोल के समाचार सुखद नही है क्योकि कुछ दल जो तटस्थ थे अब तक --तेल व तेल की धार देख रहे थे वे गठबंधन से दूरी ही बना लेंगे क्योकि जब सरकार मोदी की ही आ रही है तब गठबंधन से मिलने का मतलब ही दाग लगाने सी बात होगी।
बेचारे नायडू कभी इधर इनसे मिल रहे थे कभी उधर उनसे मिल रहे थे अब तो विपक्ष के कुछ लोग नायडू से मिलने से ही कतराएंगे क्योकि एक्जिट पोल ने इनकी शतरंज की सियासत बिगाड़ दी है इनकी तमाम रणनीति का कबाड़ा कर दिया है।विपक्ष की एकजुटता के अभियान पर सीधा प्रहार कर दिया है अब देखना यह है कि 23 मई इन एक्जिट पोल पर दस्तखत करती है या फिर टूटे इन बेचारों के दिलो को सुकून देती है।
PLEASE LIKE SHARE FOLLOW ME.. संजय बाफना" सनम
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