क्या अब सन्यास लेंगे सिद्धू!

ठोको ताली के डायलोग से मशहूर क्रिकेटर ,कपिल के कॉमेडी शो के विशेष अतिथि,व पूर्व सांसद तथा वर्तमान में कांग्रेस की पंजाब सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू जो कि अपनी वाक पटुता व शेरो शायरी से रंगी तेज तर्रार अभिव्यक्ति के लिए लोगो के दिलो पर राज किया करते थे -वे सिद्धू न सिर्फ अपनी राजनीतिक जमीन को अब छोड़ते हुए नजर आ रहे है बल्कि अब उनके चाहने वाले भी खुद को कोस रहे है कि इस आदमी के हम प्रशंसक भले क्यों बने थे।

पानी पी पी कर कभी सोनिया गांधी परिवार व कांग्रेस के कुनबे को कोसने वाले सिद्धू ने जब से कांग्रेस में पर्दापण करते हुए सोनिया गांधी भक्ति गानी शुरू की थी तब से ही इस सरदार की मन की सरदारी पर से लोगों का विश्वास उठ गया था।

देश कभी नही भूल सकता सिद्धू की उस पाकिस्तान यात्रा को जो देश मे भारी विरोध के बाद अपने यार इमरान के सत्तासीन होने पर यारी निभाने के लिए गए थे पर देश उस वक्त अपने विरले सपूत भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के दुनिया को अलविदा कहने से शोक में डुबा हुआ था। सिद्धू को अटल बिहारी वाजपेयी जी की अंतिम यात्रा में अपनी श्रद्धांजलि देनी तो याद नही रही पर देश की सरहदों पर धमाके करने वाले व आतंकियों के रक्षा कवच बनने वाले पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष से बांहे मिलानी याद रही।
अपने देश के शोक,दर्द के माहौल में देश के साथ न रहकर शत्रु देश के वजीर की ताजपोशी उनके लिए अधिक महत्वपूर्ण रही।पाक की यारी वो भारत मे दिखाते रहे है और उसका खामियाजा भी उनको भुगतना पड़ा है सबसे पहले तो आम जनता में सिद्धू के प्रति विरोध को देख कर उनको कपिल के उस शो से हटाया गया और कांग्रेस में उनकी पत्नी का टिकट काट कर यह जता दिया कि आपकीं औकात कांग्रेस पार्टी में कितनी है इतना ही नही कांग्रेस की एक सभा मे सिद्धू को बोलने तक का अवसर न देकर कांग्रेस ने भी सिद्धू के पंख काटने शुरू कर दिए।अब सिद्धू देश के प्रति स्वामिभक्ति न दिखा कर पार्टी में किस्तों में हो रहे अपमान के बावजूद चाटुकारिता की परंपरा का निर्वाह कर रहे है जिसकी लंबी उम्र राजनीति में नही आंकी जाती।
लगता है कि सिद्धू ने राजनीति को छोड़ने की राह भी अपनी हर दिन होती फजीहत को देख कर निकाल ली है और उन्होंने यह कह दिया है कि अगर राहुल अमेठी से हार गए तो वे राजनीति छोड़ देंगे क्योकि जिस सम्मान से वे भारतीय जनता पार्टी में रहे है अब सिद्धू की हालत न घर के रहे न घाट के रहे जैसी हो गई लगती है।

पंजाब के मुख्यमंत्री के साथ कांग्रेस का एक तबका सिद्धू को पसंद कम करता बताया जाता है तथा सिद्धू के दोगलेपन को कॉंग्रेस के मौजिज लोग भी अच्छी तरह से समझ रहे है इसलिए उन्हें कोई न तो भाव दे रहा है न ही कोई उन पर राय दे रहा है।शायद कांग्रेस भी रुको ओर देखो की नीति पर चल रही है कि सिद्धू खुद ही राजनीति से सन्यास ले ले या फिर उनके हालात इस तरह से कर दिए जाएं कि वो मजबूर हो कर राजनीति छोड़ दे

सिद्धू की तरह एक ओर नेता ने भाजपा से बागी होकर कांग्रेस में एंट्री मारी है जिन्हें बिहारी बाबू के नाम से जाना जाता है और आते ही इस बाबू ने कांग्रेस को जिन्ना के नाम से जोड़ कर कांग्रेस की किरकिरी भी कर दी।
कुल मिलाकर बिन पेंदे के ऐसे लोग न तो देश के हो सकते है न ही पार्टी के हो सकते है ये लोग तो सत्ता सुख के लिए होते है और जैसे ही इसमे कटौती होती दिखती है तो वे विपक्ष की तो बात छोड़िए दुश्मन देश के भी हो जाते है।

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