क्या आपकीं राशि धनु है तो खुद को जान लीजिए।
राशि चक्र की 9 वी राशि जिसका मालिक धर्म गुरु के रूप में बृहस्पति ग्रह होता है जो कि धर्म, न्याय बुद्धिमता, नेतृत्व, व साधु संतों व घर मे बड़े बुजर्गो का कारक होता है।यह गुरु ग्रह पीले रंग का कारक होता है अर्थात पीत वर्ण की सभी वस्तुएं गुरु ग्रह के अंतर्गत आती है और गुरु ग्रह के संचरण के प्रभाव से उनमें तेजी मंदी के योग बनते है
धनु राशि का मालिक ग्रह जब गुरु ग्रह होते है तो इसका सीधा अर्थ यह है कि उस जातक की मानसिकता में गुरु ग्रह के गुणों का वैसे समावेश हो जाता है।अगर उसके जन्मांग चक्र में गुरु ग्रह की स्थिति उसके नक्षत्र व उपनक्षत्र के हिसाब से अनुकूल हो तो वो जातक शेक्षणिक क्षेत्र में बड़ी डिग्री ले कर अध्यापन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है या फिर धार्मिक आध्यात्मिक क्षेत्र की सभा संस्थाओं में ऐसे जातकों के हाथ मे नेतृत्व रहता है और धनु राशि के जातक धर्म क्षेत्र की व्याख्या भी शानदार करने वाले होते है।
धनु राशि के जातक कद काठी डील डोल से लंबे चोड़े अर्थात बलिष्ठ होते है-व्यक्तित्व पहली नजर में प्रभावित करने वाला होता है आवाज भी बुलंद होती है और बुद्धिमता उनके अपने स्वभाव से ही झलकती है।बड़े बुजर्गो का सम्मान करने वाले विनम्र होते है ।धनु राशि के जातक किसी के अधीन कार्य करने में सहज नही होते अर्थात वे अपनी मर्जी के मालिक होते है।साधु संतों के अनुगामी होते है उनकी आज्ञा को शिरोधार्य करने वाले होते है पर कार्य क्षेत्र व सामाजिक क्षेत्र में उन पर अपनी बात कोई जोर जबरदस्ती नही थोप सकता।
कालपुरुष की 9 वी राशि अर्थात भाग्य स्थान का मालिक होता है गुरु इसलिए धनु राशि के जातक परिश्रम से अधिक अक्सर भाग्य पर भरोसा करने वाले होते है -दूसरे शब्दों में इन्हें भाग्यवादी कहा जा सकता है।धनु राशि के जातक ज्योतिष,मंत्र विज्ञान,यंत्र के क्षेत्र में भी पारंगत होते है क्योकि गुरु ग्रह तो शास्त्र निपुण की क्षमता प्रदान करता है इसलिए धनु राशि के जातक बहुत सफल ज्योतिष परामर्शक अर्थात भविष्य वक्ता भी होते है।
धनु राशि की महिला जातक का वयक्तित्व आकर्षक व उनकी शारीरिक संरचना भी अतीव सुंदर होती है श्वेत वर्ण जिसमे हल्की पीली सी झलक, भरा पूरा गठीला बदन व चेहरे पर ओजस्विता व पहली नजर में मन मोह लेने वाली सी होती है पर यह सब धनु राशि के जातक व जातिकाओ पर ये प्रभाव नही पड़ता क्योकि अगर उनके चंद्रमा के साथ राहु,शनि ग्रह बैठे है या उनकी दृष्टि है तो फिर उस जातक में इन ग्रहों के प्रभाव भी शामिल हो जाते है।अगर धनु राशि के चंद्रमा के साथ स्वयं गुरु ग्रह की उपस्थिति हो तब इस राशि के प्रभाव में जबरदस्त उफान आ जाता है।
धनु राशि की जातिका कुशल उपदेशिका की भूमिका अपने परिवार,समुदाय में निभाती है उनकी बात को लोग गौर से सुनते है वो जिस क्षेत्र में होती है वहां नेतृत्व करने का हुनर रखती है। ससुराल में आने के बाद उनके ससुराल में समृद्धि आती देखी गई है पर पिता के घर मे कुछ परेशानी आ सकती है।
धनु राशि के जातक जातिकाओ को यह परीक्षण करना चाहिए कि उनके स्वर्ण आभूषण अर्थात सोने की चेन,अंगूठी,ब्रेसलेट कभी उनके शरीर से निकल कर गुम तो नही होती अगर ऐसा होता है तो इसका अर्थ गुरु उनके जन्मांग चक्र में संभवतया अनुकूल स्थिति में नही है।धनु राशि वालो को पीले रंग को रुमाल के रूप में या परिधान के रूप में या फिर कलम के रूप में साथ रखना चाहिए।सोने का कुछ न कुछ आभूषण वो धारण ही रखे बशर्ते सोने की वस्तुएं उनसे गुम न होती हो।स्वास्थ्य के क्षेत्र में लीवर, अग्नाशय, पेनक्रियाज पर विशेष ध्यान रखे।
धनु राशि के जातकों में अपने ज्ञान,बुद्धि, वाक कुशलता व नेतृत्व क्षमता का अहम हो जाता है उनको इस अभिमान से बचना चाहिए अन्यथा इससे भविष्य में उनको बड़ी हानि उठानी पड़ सकती है।इस आलेख को लाइक,शेयर करते हुए मुझे फॉलो करना न भूले व अपने विचार -सुझाव कमेंट बॉक्स में लिखने की कृपा करावें।
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