आखिर ममता को भी राम याद आ गए।
लोकसभा चुनाव 2019 में 14 मई को भाजपा के राष्रीय अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के सियासी घमासान में भाजपा और टी एम सी के कैडर के बीच मे जबरदस्त हिंसा हुई और इस उपद्रव में जन सुधारक ईश्वरचंद विद्यासागर जी की प्रतिमा खंडित हो गई।अब यह सियासत दोनों पक्षों में इस बात पर गर्म हो गई कि यह मूर्ति किसने तोड़ी और एक दूजे पर यह आरोप लगाकर बंगाल की संस्कृति को अपमानित करने की कोशिश बता कर 7 वे चरण के मतदान में वोटों की खेती में अपनी अपनी फसल तैयार करने में दोनों पक्ष लगे है न तो इसमे भाजपा पीछे रही और न ही तृणमूल चुकी पर इन दोनों पक्षो के बीच हुई हिंसा से बंगाल के शरीर पर एक और जख्म की संख्या जरूर बढ़ गई।
इस मूर्ति को पंच धातु से बनाने की बात जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तरप्रदेश की एक जनसभा में कही तो ममता की जुबान पर अनायास राम मंदिर आ गया--ममता दीदी का जबाब था कि जो 5 वर्ष में राम मंदिर न बना सके वो यह मूर्ति क्या बनायेगे! ।ममता दीदी ने यह भी कहा कि बंगाल के पास मूर्ति बनाने के पैसे की कमी नही है हम खुद यह मूर्ति बनाएंगे।
अब सवाल यह है विद्यासागर की इस मूर्ति के बीच राम मंदिर का सवाल ममता ने भला क्यों उठा दिया--क्या ममता भी राम मंदिर बनवाना चाहती है या फिर मोदी पर तंज कस कर 7 वे चरण के मतदान में हिन्दू वोटर्स को राम मंदिर याद दिलाकर वोटों का धुर्वीकरण की राजनीति चाल है।
लोग कहते है कि दीदी की जुबान पर राम का नाम आना यह भी बड़ा कमाल है।कमल को रोकने के लिए राम मंदिर के लिए मोदी सरकार के कुछ न करने को ममता हिन्दू वोटर्स को इस एक पंक्ति से बहुत कुछ बताने की कोशिश कर रही है।वोटर्स अपना निर्णय क्या लेते है यह वक्त बताएगा पर ममता ने भी राम मंदिर के नाम पर भाजपा पर जबाबी स्ट्रोक तो खेल दिया है अर्थात सियासत की इस पिच पर कोई अपना अवसर नही छोड़ रहा है और बयानों की इस गर्मी का तापमान कुदरत के तापमान से भी ऊपर जा रहा है।
टिप्पणियाँ