काश वो भी समझ ले अपनी नाकामी को।

हमसे ज्योतिष गणना में चूक हुई---

एक भविष्यवाणी सफल पर दूसरी में हुई चूक।

गणना में हमने संदेह व्यक्त किया पर उस संदेह को प्रभावी नही माना।

गणना की प्रभावी सीख मिली।

देश के 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के कल के परिणामों में  न जाने कितने चुनावी विश्लेषण गलत हुए और ज्योतिष गणनाएं भी गलत हुई विशेषकर छत्तीसगढ़ परिणामो ने तो सबके आंकलन को औंधे मुंह गिरा दिया।
राजस्थान पर मेरे 2 ज्योतिष विश्लेषण थे पहला तो आज से करीब 2 महिने आसपास का था जब ग्राउंड रिपोर्ट में भाजपा का लगभग सफाया था अर्थात 20 से 40 सीट के आसपास के समीकरण बन रहे थे उस वक्त मैंने होरारी ज्योतिष के आधार से भाजपा को टक्कर में आने की भविष्यवाणी मजबूत विश्वास के साथ की थी।मेरा आंकलन  यह भी था कि अगर तोड़ फोड़ की जगह मिली तो भाजपा सरकार भी बना ले तो कोई आश्चर्य नही पर भाजपा कांग्रेस को कड़ी टक्कर देगी।
और देखा जाए तो यह प्रेडिक्शन सही निकला।
पर कुछ दिन पहले 90 सीट के सवाल पर की गई भविष्यवाणी गलत साबित हुई और इससे शोध के रूप में हमारे लिए यह सीख मिली कि कसपल डिग्री से भी अधिक प्रभावी उस दिन के गोचर की स्थिति होती है।अगर कसपल डिग्री लाभ भाव का संचरण दिखा रही है तथा उस डिग्री विशेष में ग्रह स्थिति विपरीत इंगित हो रही है तो लाभ भाव की डिग्री भी वहां फेल हो जाएगी और उस दिन ग्रह विशेष का संचरण लाभ भाव की डिग्री में होने के  बाद भी अगर अपने नक्षत्र,उपनक्षत्र से विपरीत स्थिति बना रहा है तो बाजी पलट देगा।
ठीक इसी प्रकार खर्च या 8 भाव के परिणाम भी तब खराब नही आएंगे अगर उस डिग्री विशेष में ग्रह नक्षत्र,उप नक्षत्र की स्थिति अनुकूल हो तो अप्रत्याशित लाभ भी मिल जाएगा।
मैंने अपने इस वीडियो में इस स्थिति को विपक्ष अर्थात कॉंग्रेस के लिए हितकारी माना था पर मैंने डिग्री को अधिक प्रभावी माना और उस आधार पर कांग्रेस के संभावित अप्रत्याशित लाभ को नजर अंदाज कर दिया बस चूक वो हुई।
मेरे पास इस गणित में 2 रास्ते थे -मुझे दोनों रास्तों में ग्रह संक्रमण को डिग्री से प्रभावी समझ कर आगे बढ़ना चाहिए था उससे फिर 90 सीट में जबाब नकारात्मक हो जाता ।पर डिग्री की वजह से टक्कर देने में भाजपा सफल रहती।

कुल मिलाकर हम उस हकीकत को स्वीकार कर रहे है जहाँ प्रभावी सूत्र की जगह हमने आंशिक सूत्र को प्रभावी माना।
हमने अपनी चूक स्वीकार की और इसे सीख के रूप में अंगीकार किया।
सियासत अपनी हार अर्थात चूक को क्या स्वीकार करेगी?
और अपेक्षित सुधार मन से क्या कर पायेगी?

संजय सनम

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