शुभकामनाएं विजयादशमी की।

माँ दुर्गा के प्रति श्रद्धा आस्था के 9 दिन के महोत्सव के बाद बुराई पर अच्छाई की जीत का विजयादशमी का पर्व आ गया।

मन के रावण को राम में बदलने का पर्व है---मुखोटों के रावण रूपी पुतले हम ने खूब जला लिए --गली गली में रावण जलाने से भी रावण नही मिटे वरण उनकी संख्या में बढ़ोत्तरी ही हुई है इसलिए रावण के पुतले जलाने बन्द कीजिये---क्योकि अक्सर असली रावण मुखोटों के रावण को जलाते दिखते है-वे मुखोटे जलाकर बच जाते है। बेचारे मुखोटे बेवजह जल जाते है।

इसलिए रावण को जलाना छोड़िए उनको राम में बदलने की कवायद कीजिये।
इन दिनों तो सूर्पणखा भी अवतरित हो गई लगती है।

रावण की समस्या तो मिटी ही नही अब एक नई समस्या आ गई---
इसलिए न तो रावण के मुखोटे जलाने की जरूरत है न ही सूर्पणखा के नाक को काटने की।
भले ही इन्होंने सरे आम कइयों की नाक काट दी है पर इनको भी समझने और समझाने की दरकार है।
इस बार विजयादशमी प्यार से समझ कर समझाने की दरकार है।
आइये जलाने को छोड़ कर समझाने की कोशिश कर ले।

शुभ विजयादशमी।
संजय सनम

18/10/2018

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