गर गलतियां यु ही होती रही
हालात यु ही चलते रहे
आँखों में पट्टी यु हीबंधी रही
तो गरिमा का चीरहरण होता रहेगा---
गर धर्म की पवित्र चद्दर पर
सियासत गोटियां चलती रहेगी
पद की लोलुपता के खेल में
सामाजिक मंचों पर धूल उड़ती रहेगी---
गर आम आदमी के विश्वास को छला जायेगा
गर अपनी पसंद के प्यादों को धरा जायेगा
गर श्रद्धा के नाम पर खामोश रखा जायेगा
गर इंगित की आड़ पर धर्म हरा जायेगा
तब किसी दिन कोई चिंगारी शोला बन जायेगी
सवालों की कतारे तब फोड़ा बन जायेगी
विसंगतियों को पोसने वालो -सुन लेना
आम आदमी की मुट्ठी तब मुक्का बन जायेगी
लगता है बंगाल की माटी में यह सूत्रपात होना है
जो छल रहे है उन पर अब वज्र पात होना है
युवा के आक्रोश का अब शंखनाद होना है
तथाकथित ठेकेदारों से अब तक का हिसाब होना है---
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