सेवा की भावना अगर हो तो बिना संस्था के बोर्ड व् बिना पदाधिकारियों की जमात के बिना भी हो सकती है।
लोग सेंकडो करोडों रूपये सेवा के नाम पर आडंबर में फूंक देते है और अपनी यश गाथा के ग्रन्थ से छपवा लेते है---
पर सच्ची सेवा करने वालो के मन सच्चे होते है--अपनी धुन के पक्के होते है---अपना कार्य,व्यवसाय 2 घण्टे के लिए अपने अधीनस्थों के हवाले कर सड़क पर उतर जाते है---तब लगता है कि घोर कलियुग में भी ये युवा सतयुग की बयार लाते है और न जाने कितने दिलों की दिल से निकलती दुआओं का खजाना पाते है।
कोलकाता इजरा स्ट्रीट इलेक्ट्रिक मार्केट के उधमी युवाओं व् उनके प्रेरणा स्रोत श्री हिम्मत बरडिया को सलामी बनती है।
देखिये इस लिंक को---दिल सोचने को मजबूर हो जायेगा।
https://youtu.be/iBKyyLRBxt4
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