योगी का दुआ मन्त्र

आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री आदित्य नाथ योगी ने लखनऊ के नामी  बड़े सरकारी अस्पताल में बहुत सरल,सहज, व् भावपूर्ण अंदाज में डॉक्टर्स को उनके प्रोफेशन की गरिमा व् मानवीय मूल्यों की महत्ता का पाठ पढ़ाया और समझाया कि आपका यह क्षेत्र मानवीय संवेदना का क्षेत्र है जहाँ दौलत नहीं बल्कि दुआओं की जोड़ बढ़ाई जानी चाहिए।

योगी जी ने कहा कि आप जिस दौलत के लिए मरीजो के साथ खिलवाड़ करते हो--मानवीयता के साथ मजाक सा करते हो वो दौलत आपके साथ स्थायी नहीं रहने वाली अर्थात आपके साथ नहीं जाने वाली।
असली दौलत है दुआओ की संपत्ति--जिसे कोई नहीं छिन सकता और यह आपके साथ भी जायेगी पर असली संपत्ति की चाह क्यों नहीं दिखती? छलावे की तरफ मानसिकता जा रही है!

श्री योगी ने अपने उदबोधन में हर वो कड़वा सच कहा जो इस पेशे की मर्यादा व् गरिमा को तार तार करता आज दिख रहा है---योगी अपने राजनीतिक जीवन के 15 -20 वर्ष पहले के अनुभवों को बताने से नहीं चूके जब गोरखपुर में चिकित्सक की हत्या के बाद उन्होंने तब तक विरोध किया था जब तक उचित कार्रवाई नहीं हुई।

श्री योगी ने कहा कि ऐसे ही एक डॉक्टर के मामले में जब वो धरना प्रदर्शन में बैठे थे तब उनके साथ कुछ डॉक्टर्स तो थे पर आम जनता से लोग नहीं थे तब वहां से निकलते एक व्यक्ति ने योगी जी से शिकायत के लहजे में जब यह कहा कि महाराज आप किनके लिए बैठे है ये तो कसाई है जो किसी को नहीं छोड़ते ।

योगी जी ने अपने अनुभव को बयान कर डॉक्टर्स को यह जता दिया कि आपकी दौलत की चाह ने आपको इतने नीचे गिरा दिया है कि  आप आम लोगो को उस कसाई की तरह लगने लगे हो जो मानवीय संवेदना पर छुरी चला रहा हो।
बहुत नपे तुले शब्दो में योगी जी ने डॉक्टर्स को चेता दिया कि स्वास्थ्य के साथ दौलत की हवस की खिलवाड़ अब और नहीं चलेगी।

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