अंतिम यात्रा व्यक्ति का मोल करवाती है---

जिंदगी एक सफर है--जीवन के साथ मौत निश्चित है।
जिंदगी और मौत के बीच के इस वक्त  में व्यक्ति का जीवन जीने का  अंदाज, परिवार,समाज,और राष्ट्र के लिए उसके अवदान, धार्मिक संस्कृति पर उसका समर्पण और अपने जीवन में वो व्यक्ति कितने परिवारों का सबल बना,कितनो की आशाओं को उसने पूर्ण किया और कितनो के दिलों में उसने अपना नाम लिखा?
इन सबका मूल्यांकन पूरी जिंदगी में उसके जीते जी शायद तय नहीं हो पाता मगर जब दुनियां छोड़ देने की खबर आती है और तब लोग उसके न होने की बात सुनकर रोते-बिलखते दिखते है,कुछ खास उनका खो गया यह अहसास दिखता है-- सन्नाटा सा छा जाता है।
आँखे बहती दिखती है और एक बड़ी जमात को अनाथ होने  सा अहसास होता है--जब लगता है इस दुनियां में उनके हर सुख दुख को सुनने वाला चला गया ,उनके साथ हर स्थिति में  साथ देने वाला चला गया तब जो रुलाई फूटती है वो यह बता देती है कि इस व्यक्ति के दुनियां में होने का अर्थ क्या था और अब न होने का दर्द क्या है?
तब पता चलता है कि इस व्यक्ति का मन कितना बड़ा था--उसका मानवीय धर्म कितना बड़ा था--और  उसके अवदानों का कद कितना बड़ा था?
और जब ऐसे व्यक्ति दुनियां से विदा लेते है तब उनकी
मौत भी अक्सर महबूबा की तरह आती है और कुछ ही पलों में अपनी बांहों में समा कर ले जाती है।
अक्सर ऐसे व्यक्ति आखरी समय तक सक्रिय रहते है और कुछ भविष्य के कार्य भी वो पहले से पूर्ण अपनी तरफ से कर देते है और पंडित मरण से मौत का वरण करते है।
10 अप्रैल 2017 को  राजस्थान की धरती के सपूत श्री मूलचंद जी मालू ने अपनी जन्म भूमि  सरदारशहर में श्री हनुमान जयंति की पूर्व संध्या में जब दुनियां से अचानक विदा ले ली तब न सिर्फ उद्योग जगत बल्कि सामाजिक,सांस्कृतिक, धार्मिक जगत में हलचल मच गई।
ओसिया जी के माता रानी दरबार, सालासर के हनुमान दरबार,और भैरव बाबा के दरबार में अपनी हाजरी देकर स्वस्थता के साथ आकर अपने कुबेर हाउस में बात चीत करते हुए यह अचानक घटना हो गई--और लोग स्तब्ध से रह गए।
श्री मालूजी की हनुमान भक्ति तो बे मिसाल थी और इच्छापूर्ण बालाजी का भव्य मंदिर उनकी इस भक्ति को सदियों तक सुनाता रहेगा।
बालाजी के इस भक्त को अपने जन्म दिन के उत्सव में श्री हनुमान अपने पास ही  बुला लेंगे यह कोई सोच भी नहीं सकता था।
कुबेर समूह के संस्थापक श्री मालू जी की सह्रदयता,परोपकारिता ,दानवीरता के किस्से अनेको मिलेंगे पर जाने कितने परिवार उनके अब इस दूनियां में न होने के दर्द को अपनी जिंदगी में महसूस करेंगे।
69 वर्षीय श्री मालू जी ने दौलत की अमीरी का वास्तविक अर्थ दुनियां को बताया और अपने दिल की अमीरी से दौलत का मान बढ़ाया।
दौलत कमाना बड़ी बात है पर परोपकार की राह पर अपनी उस दौलत को विसर्जित करना आसान नहीं होता।
मालूजी जैसे लोग कभी मर नहीं  सकते क्योंकि न जाने कितने दिलों में उनके सहारे की यादें है  और वे स्मृतियां कभी ऐसे व्यक्तित्व को भूलने ही नहीं देगी।
व्यक्ति मरता है पर  ऐसे व्यक्तित्व  अमर ही होते है।
हर व्यक्ति में अच्छाई और कमजोरियां होती है पर जब अच्छाई का पलड़ा बहुत अधिक वजनदार हो तब कमजोरियों की जोड़ उस वक्त नहीं लगती।
फर्स्ट न्यूज परिवार दिवंगत आत्मा को श्रद्धा पुष्प समर्पित करता हुआ   आध्यात्मिक उत्थान की प्रार्थना करता है तथा उनके आत्मिय जनों के प्रति हिम्मत व् धीरज के साथ श्री मालू जी के सेवा पथ पर अनवरत चलने की कामना करता है।
संजय सनम
संपादक फर्स्ट न्यूज़
संर्पक सूत्र-72780 27381

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