गृह मंत्री जी
कभी नक्सली
कभी आतंकी
कभी पत्थरबाज
हमारे जवानों पर प्रहार कर जाते है-
जब पागल भेड़िये हमारे शेरों का शिकार कर जाते है
और आप निंदा प्रस्ताव तुरत पढ़ जाते है
मगर देशवासियों के कलेजे धधक धधक जाते है
अब तो उधर भी आपकी सरकार
और केंद्र में भी आपकी मजबूती का करार है
फिर इरादे इतने कमजोर क्यों
और क्यों लगते आप लचर लाचार है?
अब और--
यह देश वीर जवानों की बेमौत शहादत नहीं देख सकता
आपकी लचरता से बेवजह की कुर्बानी नहीं देख सकता
देश के अंदर के देश द्रोहियों को आप निपटा नहीं सकते
पत्थरबाज से उन पागल कुत्तों को राह से हटा नहीं सकते
तब आपके बनावटी साहस को हम और पचा नहीं सकते।
अब फैसला इस पार या उस पार हो
पहले देश के गद्दारों का काम तमाम हो
न कोई नक्सली बन्दुक उठा सके
न कोई पत्थरबाज पत्थर चला सके
सबसे पहले इनके ये हाथ हलाल हो-।
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