उत्तर प्रदेश की चमत्कारिक विजय और 5 राज्यो में हुए विधान सभा चुनावों में 4-1 से शानदार परिणाम अपने पक्ष में करने के बाद भाजपा के कार्यकर्ताओं में एक नया जोश आना तो स्वाभाविक ही है और इस जोश ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व में एक नया टॉनिक भर दिया है।
अब सियासत की शतरंज को अपने नाम करने के लिए भाजपा के निशाने पर बंगाल है जहां अग्निकन्या की तृणमूल का एक तरफा अभी राज है।
बंगाल जो कभी लाल निशान के वाम से जाना जाता था अब वो हाशिये पर चले गए है और भाजपा अपना क्षेत्र बनाने की जुगत में है---अगर उत्तर प्रदेश के परिणाम इतने सकारात्मक भाजपा के लिए नहीं आये होते तो बंगाल भाजपा के कार्यकर्ताओं को अभी भी बंगाल में चुनोतियों का कुछ अधिक इस्तेमाल करना पड़ता।
अब लगता है बंगाल भाजपा कैडर के दिन फिर रहे है क्योंकि केंद्रीय नेतृत्व ने 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए अभी से तैयारी ग्राम अंचल से शुरू करने के लिए हरी झंडी दे दी है और केंद्रीय मंत्री मंडल के कई नेता अब बंगाल में अपनी ड्यूटी देने वाले है-इससे भाजपा कैडर का उत्साह बढ़ेगा और उसकी ऊर्जा का लाभ भाजपा को अपने विस्तार में मिलेगा।
ममता बनर्जी इन दिनों राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के बाद देश के अन्य प्रान्तों में अपनी पार्टी के विस्तार को देख रही है पर अब बंगाल में भाजपा आने वाले दिनों में उनके लिए कड़ी चुनोती बनती लग रही है।
बंगाल भाजपा की कमान अभी दिलीप घोष के हाथ है जिन्होंने कमान हाथ में लेते ही अपनी सीट को तृणमूल की आंधी के सामने बचाया और पहली बार में ही विधानसभा पहुँच गये।
श्री घोष शांत,सह्रदय व्यक्तित्व के मालिक है पर इनके साथ कोई फायर ब्रांड होना बहुत जरुरी है।
रूपा गांगुली की इमेज फायर ब्रांड जैसी थी और वो निडर होकर कूद भी पड़ती थी जिससे भाजपा के कार्यकर्ताओं में जोश मिलता था पर अब वो राज्यसभा में जाने के बाद उनका दायित्व बंट गया है और इसलिए ममता के सामने कोई वैसा जबाबी चेहरा चाहिए।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी माकूल जबाब बन सकती है अगर बंगाल के प्रभारी के रूप में दायित्व उनको दे दिया जाये तो स्मृति ईरानी यहाँ कमाल कर सकती है।
लॉकेट चटर्जी की भूमिका भी जमीन से जुडी हुई है अगर केंद्रीय हाई कमान रूपा गांगुली,लॉकेट चटर्जी,व् स्मृति ईरानी की तिकड़ी के साथ शंख नाद करे तो भाजपा आने वाले लोकसभा चुनाव में कमाल कर सकती है ।
हमको यह नहीं भूलना चाहिए कि ममता बनर्जी के वोट बैंक पर सेंध लगाना इतना आसान नहीं है क्योंकि उनका वोट बैंक सिर्फ अल्प संख्यक ही नहीं बल्कि ग्राम अंचल में भी लोग ममता को बहुत अधिक मान देते है और यह भी मानना होगा कि ममता जी ने लोगो के आम जीवन के लिए कुछ कार्य भी ऐसे किये है जो उनसे जुड़ाव को मजबूत करते है।
अगर भाजपा को बंगाल में अपनी धमाके दार उपस्थिति दिखानी है तो भाजपा संग़ठन से कुछ लोगो को टाइट या फिर उनकी छुट्टी करने का कड़ा फैसला भी लेना होगा।
कुछ लोग भाजपा के सिद्धांत और संस्कृति का हनन करते हुए खुद को ताजा कर रहे है और गुटबाजी इस रूप में भी है कि एक दूजे की टांग खिंचाई में समय की बर्बादी हो रही है।
जब तक संगठन अनुशाषित और स्वस्थ नहीं होगा तब तक यहां किसी बड़े चमत्कार की आशा नहीं रखी जा सकती।
भाजपा प्रदेश के अध्यक्ष को कुछ कड़े फैसले लेने होंगे व् गुटबाजी की दीवारों को तोड़ना होगा-मनमानी चलाने वालों को लताड़ लगानी होगी और कार्यकर्ताओं के सम्मान की रक्षा करनी होगी।
सबका साथ -सबके विकास के नारे को चरितार्थ करने की शुरुआत सबसे पहले अपने संगठन में देखनी होगी कि कितने लोग दूसरों को नीचे गिराकर अपना विकास करने में लगे है।
दिलीप घोष का नेतृत्व सक्षम है पर इनके साथ कुछ फायर ब्रांड इमेज के लोग जुड़ने से श्री घोष को मजबूती मिलेगी।
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