सत्ता की कुर्सियों पर बैठे रहने वाले चुनावी मौसम में वोटों के लिए सड़कों पर उतरे है सियासत के नेता।
सड़क दबाब में दिख रही है---शायद बोझ को सहन करने में असमर्थ सी है--
जनता सियासत के इस मैले को देख रही है---
हाथ जोड़े कितने शरीफ से लग रहे है ये सब नेता----
क्या ये लोग जो इतने शरीफ दिख रहे है आज--बीते कल क्या थे----और आने वाले कल को कैसे दिखेंगे?
कश्मकश वाला सवाल तो जनता के माथे पर छोड़ जायेंगे ये तमाम नेता--/
पहले सड़क इनके बोझ से दबी थी---
फिर जनता सवाल से
और बाद में सरकार से दबेगी----
यह कैसा लोकतंत्र?
वोट हमारा,अधिकार हमारा
पर फैसला उनका---
जनता पूछ रही है इस लोकतंत्र से
वो आखिर कहाँ है?
सड़क दबाब में दिख रही है---शायद बोझ को सहन करने में असमर्थ सी है--
जनता सियासत के इस मैले को देख रही है---
हाथ जोड़े कितने शरीफ से लग रहे है ये सब नेता----
क्या ये लोग जो इतने शरीफ दिख रहे है आज--बीते कल क्या थे----और आने वाले कल को कैसे दिखेंगे?
कश्मकश वाला सवाल तो जनता के माथे पर छोड़ जायेंगे ये तमाम नेता--/
पहले सड़क इनके बोझ से दबी थी---
फिर जनता सवाल से
और बाद में सरकार से दबेगी----
यह कैसा लोकतंत्र?
वोट हमारा,अधिकार हमारा
पर फैसला उनका---
जनता पूछ रही है इस लोकतंत्र से
वो आखिर कहाँ है?
टिप्पणियाँ