वजह यह थी---

लोग पूछ रहे थे भाजपा के नेताओ से---

गोवा, मणिपुर में संख्या नहीं थी फिर भी नेता का चुनाव फटाफट कर लिया।

उत्तर प्रदेश में संख्या सीमा पार थी पर नेता चुनने में इतना वक्त लग गया?

जो जबाब भाजपा के नेता नहीं दे सके---वो जबाब हम दे रहे है----

उत्तर प्रदेश में दुल्हन तैयार थी इसलिए चिंता नहीं थी और तब उम्मीदवार भी अधिक तैयार थे इसलिए सोच समझ कर  निर्णय करना जरुरी था--इसलिए देर लगनी थी वो जायज  भी थी---क्योंकि दुल्हन की हैसियत भी खूब बड़ी थी।

गोवा,मणिपुर में तो दुल्हन कोसो दूर थी इसलिए दुल्हन की दौड़ कम पहले स्वयम्बर में भाग लेने से वंचित न रह जाये इसके लिए प्रयास था और तब आपस में कोई खींच तान नहीं थी--बल्कि स्वयम्बर तक एंट्री की कोशिश थी और इसमें सबसे आगे जो रह सकता था उसको वो आगे खुद सब मिल कर कर रहे थे और इस वजह से वो दुल्हन को लेकर भी आ गए।

जो दुल्हन के कुछ करीब थे वे यह समझ बैठे थे कि अब ये हमारी ही है इसलिए दुल्हन को बेकरार करने की गलती कर बैठे अब खुद बेकार से लग रहे है।

टिप्पणियाँ

sanjaysanam. com ने कहा…
सियासत और सत्ता के बीच प्यार,इकरार,बेक़रार और करार की यह राह है।
यहाँ वफ़ा की राह मुश्किल पर बेवफा बहुत आसान राह होती है।