बदमिजाज है मनोज तिवारी

एक कलाकार जब सांसद हो गया तब वो अपने कला के धर्म को भूल कर सांसद के गरूर से इतना भर गया कि एक स्कूल के कार्यक्रम में एक शिक्षिका जो संचालन कर रही थी ने उनसे दो  शब्द के साथ गाने की फरमाइश क्या कर दी कि वे उसको  फटकारते हुए अपनी सांसद गिरी दिखाने लगे और उस संचालिका को मंच से न सिर्फ नीचे उतर जाने बल्कि उस पर कार्रवाई करने तक की धमकी दे डाली।
जब पत्रकार ने उनसे इस विषय पर पूछा तो पूरे वाकये को तोड़ मरोड़ कर कहा,अपनी बदमिजाजी को बयान नही किया।
जब पत्रकार ने उनसे यह पूछा कि एक  गायक कलाकार से अगर कोई गीत गाने की फरमाइश हो भी गई तो इसमें इस कदर बिफरने व् उस महिला को अपमानित करने की ऐसी क्या बात थी?
तब मनोज तिवारी का जबाब सुनकर आपका खून भी उबल सकता है---उन्होंने कहा कि  ऐसा क्या हो गया?
क्या उस महिला ने आत्महत्या कर ली,या कोई एफ आई आर दर्ज की है---जब उस महिला को कोई तकलीफ नहीं है तब आपको क्यों है?
क्या भाजपा ऐसे व्यक्तियों के हाथ में दिल्ली की कमान देकर  सुशासन लाना चाहती है?
इतना गरूर जिसको सांसद बनने पर हो जाये वो गर कभी मंत्री बन गए तो  भावनाओ पर कितना कहर ढा सकते है।
ऐसे घमंडी व्यक्ति को तुरंत प्रभाव से दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष पद से हटाया जाना चाहिए।
मनोज तिवारी ने कला व् उनके कद्रदानों का अपमान किया है -उन्होंने एक नारी शिक्षिका का अपमान किया है उनको कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

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