अजब यह चुनावी घमासान
आरोप-प्रत्यारोप के तमाम तीर -कमान
झूठे वादों की भरमार
सियासत का ये अजब सा सदाचार--
जनता के हाथ में
कहते है पतवार
पर जनता खुद मझधार में
किससे कहे अपना हाल?
वाह रे सियासत----
तेरी ये अजब सी बारात
दूल्हे ही दूल्हे
जैसे कुर्सी हुई दुल्हन का ख़िताब
और ये चुनाव हुआ
स्वयंवर सा आचार
थोड़ा तो रख लेते कुछ नेक विचार--
जिसके वर इतने
कभी तुम
कभी वे
फिर भी कर लेते
पाणिग्रहण संस्कार!
आरोप-प्रत्यारोप के तमाम तीर -कमान
झूठे वादों की भरमार
सियासत का ये अजब सा सदाचार--
जनता के हाथ में
कहते है पतवार
पर जनता खुद मझधार में
किससे कहे अपना हाल?
वाह रे सियासत----
तेरी ये अजब सी बारात
दूल्हे ही दूल्हे
जैसे कुर्सी हुई दुल्हन का ख़िताब
और ये चुनाव हुआ
स्वयंवर सा आचार
थोड़ा तो रख लेते कुछ नेक विचार--
जिसके वर इतने
कभी तुम
कभी वे
फिर भी कर लेते
पाणिग्रहण संस्कार!
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