दर्द युवाओं की जमात का--उनके शब्द

कोलकाता वासियों समय निकालकर २ मिनट पढ़े क्यों की यह सवाल आपकी युवा पीढ़ी का है।

बंधुओ सादर जय जिनेन्द्र

आज के इस आलेख की शुरुआत ही *अफ़सोस* से करनी पड़ रही है क्योंकि जो घटनाक्रम शब्दो के माध्यम से सामने आ रहे है वे यह साफ बता रहे है कि अब कोलकाता तेयुप के पूर्व अध्यक्ष  जिन्होंने अपने खून पसीने से तेयुप कोलकाता को सींचा था वही इसे तोड़ने को प्रतिबद्ध है।

मैं नाम लेना चाहूंगा भाई श्री सुरेंद्र जी दुगड़, भाई श्री रतन जी दुगड़, भाई श्री मदन जी मरोठी एवं भाई श्री पंकज राय जी सेठिया का जिन्हें अब तेयुप कोलकाता से किसी प्रकार का अपनापन  नहीं रह गया है। जो किसी जमाने में तेयुप कोलकाता को संग़ठन का पाठ पढ़ाते थे आज अपने नाम के खातिर वही अध्य्क्ष तेयुप कोलकात्ता के विभाजन में लगे है।

*किंचन मात्र भी चिंतन नहीं आया और लग गए तेयुप कोलकाता को तोड़ने में*।

परमपूज्य गुरुदेव आचार्य श्री महाश्रमण जी तो करुणा निधान है, करुणा के सागर है। क्या इनका पूर्व होने के नाते इतना भी दायित्व नहीं बनता था या इनके मन में नहीं आया की एक बार करुणा निधान के चरणों में जाकर निवेदन करे की गुरुदेव तेयुप कोलकाता को एक ही रहने दे एक रहने में ही इनकी शक्ति है, ज्यादा नहीं तो आपके चातुर्मास तक इन्हें एक रहने दे।
मैं बताना चाहूंगा श्री सुरेंद्र जी दुगड़ के बारे में जिन्होंने आज से लगभग 10 वर्ष पहले अपने अध्य्क्ष के कार्यकाल में जब हावड़ा में अलग तेयुप का गठन होने की बात हुई तो  इन्होंने उत्तर हावड़ा में साध्वी श्री के दर्शन कर के निवेदन किया की यदि तेयुप कोलकाता टूटती है तो में अपने अध्य्क्ष के पद से इस्तीफा दे दूंगा।
परंतु आज इन अध्य्क्ष लोगो को क्या हो गया है। क्यों आज इनमे तेयुप कोलकाता के लिए संवेदना नहीं है। क्यों ये तेयुप कोलकाता का अहित करने एवं उसे विभाजित करने पर लगे है।

मुझे तो लगता है इनका पूर्णतया राजनीतिकरण हो चूका है, एवं शायद ये सब अध्य्क्ष अपने स्वार्थ सिद्धि हेतु बिक चुके है। नाम और शोहरत के चक्कर में इन लोगों ने आँखों पर पट्टी बांध ली है कि हमे तो कुछ बुरा होता दिखाई नहीं देता। जिन कार्यकर्ताओ को इन्होंने तेयुप कोलकाता में जोड़ा था आज उनको भी भ्रामक पथ दिखा कर तोड़ने की ठान ली है। सोचो जरा आज इन लोगो को बड़े भाई एवं पूर्व अध्य्क्ष कहते हुए भी ह्रदय में आघात सा लगता है।

इन्होंने यह भी चिंतन नहीं किया कि पिछले कितने  वर्षो के कार्यकाल के पहले से भी कितने ही पैसे अभी तक बकाया है , एवं वर्तमान अध्य्क्ष श्री पवन जी सुराणा ने भी अनेको नए नए आयाम एवं कार्य अपने हाथ में लिए हुए है , बाकी पड़े रुपयों का क्या होगा , उन आने वाले अर्थ का क्या होगा। वर्तमान में जो तेयुप कोलकाता ने अनेक कार्यों को हाथ में ले रखा है उसका क्या हेगा कोई भी कार्यक्रम रद्द होगा बदनामी किसकी होगी ।

अगर चुनाव जीतकर किसे के अध्यक्ष बनने पर किसी को परेशानी है तो मेरे को पता नहीं, लगता है यह भी विभाजन के पीछे एक बड़ा कारण है।
कुछ लोग प्रजातंत्र की इस आवाज को स्वीकार नहीं कर पाए है एवं इसे स्वयं की पराजय मानने लगे है।

 प्रजातंत्र द्वारा चुने गए व्यक्ति को उसके कार्यकाल पूर्ण होने से पहले ही येन केन प्रकारेण हटा देंना चाहते है।
क्या यह संवेधानिक है???

परमपूज्य ने मर्यादा महोत्सव पर ही संविधान के बारे में बताया था पर यहाँ तो संविधान को ताक पर रख दिया गया है

शायद लोगों की नज़र ईसकी F.D पर
परन्तु मैं दावे के साथ कहता हु अगर तेयुप कोलकाता टूटेगी तो यहाँ असौहार्द पूर्ण एवं तनाव का माहोल बन जायेगा कार्यकर्ता का संगठन के नाम से विश्वास उठ जायेगा ।

एक बार पुन कहता हु अब अपने नाम के लिये नहीं अपनी भावी पीढ़ी अपने छोटे भाईयों की सोचे यह सब छोड़ एक बार गुरुदेव के पास निवेदन लेकर जावे ओर संगठन को संगठित करने हेतु कार्य करे
मुझे तो लगता है इन पूर्व अध्य्क्ष महोदयों के दिलो दिमाग में कुछ और ही चल रहा है। हम सब *गुरु इंगित*पर जान न्योछावर करते है।  हम  इंगित की अवहेलना नहीं कर रहे है। हम तो निवेदन की बात कर रहे है एवं करुणा निधान के चरणों में निवेदन करना गुरु इंगित की अवहेलना नहीं होती। जब निवेदनार्थ कोई गुरु सानिध्य में उपस्थित होता है तो गुरुवर भी मुस्कुरा कर वात्सल्य पूर्वक जवाब देते है। हमने भी जब कूचबिहार में गुरुदर्शन कर निवेदन किया *एक तेयुप एक कोलकाता* हेतु तो गुरुदेव ने फ़रमाया की आप अभातेयुप से संपर्क करे वो हमसे इस पर बात करेंगे तो बात होगी।

तो फिर ये विभाजन की बात क्यों????

आज कोलकाता तेयुप के शाखा प्रभारी भाई अमित जी नाहटा भी इसको तोड़ने में लगे हुए है। चारो पूर्व अध्य्क्ष भी इसको तोड़ने में लगे है।

आखिर क्या कोलकाता  तेयुप कोई ऐसा कार्य कर रही है जो संघ हित के विरुद्ध है।????

क्या तेयुप कोलकाता धर्मसंघ के खिलाफ काम कर रही है???

क्या  तेयुप कोलकाता में कुछ खामिया है ???
अगर ऐसा है तो जनता एवं प्रबुदजन जवाब देवें। हमे अवगत करावें ।
गुरुदेव का आगामी चातुर्मास कोलकाता में है एवं चातुर्मास से पहले ही ये लोग योजनाबद्ध तरीके से इसे तोड़ देना चाहते है। चातुर्मास व्यवस्था समिति के अध्य्क्ष भाई श्री कमल जी दुगड़ को भी शायद कोई फर्क नहीं पड़ता चाहे कोलकाता तेयुप टूटे या कैसी भी रहे। जिनके दो दो भाइयों ने भी इसे सींचा है खुद भी इसे सींचा है। क्या उनका भी कोई नैतिक दायित्व नहीं बनता की वे बच्चों को संभाल कर रखें उन्हें समझाभुझा कर एक रखें *वो तो मानो चुनाव में हुई हार को अपनी हार मान बैठे है और लोग कहते है वो तो ईसे तोड़कर ही दम लेंगे* ।
बात तब सही लगती है कि उन्होंने आज तक तेयुप कोलकाता को चातुर्मास में नहीं जोड़ा
जब कि अन्य जो संस्थाओं को कार्य दिया है जो धर्म संघ से कोई संबंध नहीं रखती ख़ैर भगवान सब देखता ह
क्या यह कार्य उन्हें शोभा देता है। तो आओ सब मिलकर एक तेयुप एक कोलकाता का संकल्प ले। एवं सच का साथ देते हुए हर किसी तक वास्तविक स्थिति को पहुंचाएं और तेयुप कोलकाता को एक बनाये रखने में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दे।

तेयुप शुभचिंतक

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