मेरा पत्र 5

श्रीमान सुरेन्द्र सुराणा जी
हार्दिक अभिनंदन
आप तेरापंथ के प्रवर्तक आचार्य  भिक्षु जी के स्थल सिरियारी की पावन तपोभूमि की गरिमा को ह्रदय की श्रद्धा व् आस्था से सुरभित करने का दायित्व सम्हाल रहे है---
यह प्रभो यह तेरा पंथ---आचार्य भिक्षु का दिया हुआ यह पंथ,यह राह और उनकी ही उस पवित्र भूमि पर अपने आपको समर्पित करने की आपकी भावना, सेवा को मिला तब जन समर्थन--उसके बाद तेरापंथ से निष्कासन --घटनाओं और सवालों की कई कड़ियां---अब भिक्षु स्थली की सेवा का अधिभार-देखिये वक्त की करामात-जिनका यह पंथ ,उन्होंने ही बुला लिया और आप से भी हामी भरवा दी।
जो कड़िया उलझी हुई थी वो खुद आचार्य भिक्षु जी ने ही सुलझा दी--
अब कड़वी यादो को भूल जाना अच्छा है --आप दिल से अपनी सेवा से इस भूमि को फिर  तर कर दीजिये।
यह दायित्व सम्हालने के बाद आप आचार्य श्री महाश्रमण जी के आशीर्वाद के लिए भी वहां हाजरी दर्ज कीजिये।
आप अपना फर्ज पूरा कीजिये -मुझे विश्वास है वहां से स्नेह,आशीर्वाद की आप पर बरसात होगी।
मै यह भी अपेक्षा रखता हूँ कि अब संविधान का गलत इस्तेमाल सुराणा जी को रोकने के लिए नहीं किया जायेगा और सभी पक्ष अपने मनो मालिन्य को छोड़ कर तेरापंथ के प्रवर्तक की आज्ञा समझ कर  एक सूत्र में बंध जायेगे।
आचार्य भिक्षु से बड़ा कौन?
और जब हो उनकी रज़ा
तब सजा देने वाला कौन?

मेरा अनुरोध दिलो के बीच में आई दीवारों को गिरा दीजिये-सब एक जूट होकर विसंगतियों को हटाइये।
आचार्य भिक्षु के इस तेरापंथ को नैतिकता,सद्भावना,प्रेम ,विश्वास की मिसाल बना दीजिये।
अनंत शुभकामनाये---

संजय सनम
संपादक  फर्स्ट न्यूज़
संर्पक सूत्र--7278027381

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