मेरे पिछले 3-4 सन्देश तेरापंथ धर्म संघ व् समाज के लिए प्रसारित हुए थे कल के सन्देश जिसमे कुछ लोगों के तांत्रिक अभिचार के प्रयोग के प्रबल विश्वास को देख कर मैंने आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुरक्षा के लिए लोगो को आगाह किया था उसमे मिली जुली प्रतिक्रियाएं आई-कुछ ने इस विषय को उचित समझा और आचार्य श्री महाश्रमण जी के स्वास्थ्य व् धर्म संघ के लिए चिंता व्यक्त की और इसका निदान कैसे सम्भव हो उस पर भी अपनी जिज्ञासा को रखा।
तो कुछ फोन व् सन्देश ने मुझे यु टर्न लेने का उलाहना भी दिया और यहाँ तक कहा कि आपके पिछले सन्देश एक नयी सम्भावना व् हौसले को जता रहे थे पर कल के सन्देश ने हमे निराश किया कि आप ने उस सच,और आक्रोश के अंदाज को यू टर्न देकर उस प्रवाह को ही रोक दिया।
पाठक के विचार और उनकी प्रतिक्रियाएं ही लेखक का संबल होती है -आप अगर अपनी प्रतिक्रिया से मेरी कलम में उत्साह का संचार भी करते है तो आपको हक है अपनी निराशा व् आलोचना व्यक्त करने का।
मेरे दिल में दोनों प्रतिक्रियाओं के लिए सम्मान है और आपकी भावनाओ को समझने व् आपकी जिज्ञासा का समाधान देने की मेरी जिम्मेदारी बनती है--आज का यह पत्र आपको यह विश्वास दिलाने के लिए ही है कि मै मूलतः विषय से हटा नहीं हूँ और न ही मेरा अंदाज बदला है--हां विषय विसंगतियों के महत्वपूर्ण है पर आचार्य श्री महाश्रमण जी के मानसिक,शारीरिक रूप से पर्दे के पीछे अगर कोई ऐसा षड्यंत्र चल रहा हो --और कुछ लोग बड़े विश्वास से पुर जोर आवाज़ में कह रहे हो तो संघपति की सुरक्षा उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है इसका अर्थ यह नहीं समझे कि मेने यू टर्न ले लिया है--आज तक के मेरे लेखन पर न तो धमकियों से डरने का व् न ही दौलत के तराजू में बिकने का दाग है।इसलिए आप निश्चिन्त रहे-मै तब तक कलम की धार पैनी चलाता रहूँगा जब तक आम जन सामान्य मुझे इसकी स्वीकृति देगा।
स्नेही जनो के परामर्श पर मेरी हर पोस्ट अब केम्प ऑफिस की मेल में भी जा रही है।
मेरा लक्ष्य किसी पर प्रहार नहीं बल्कि विसंगतियों पर प्रहार है और आम जन सामान्य की आवाज के सवाल है।
मेरा लक्ष्य यह भी नहीं कि मै आमने सामने संघपति से बात करू और उनसे ये कड़वे सवाल करू।
मेरा लक्ष्य सिर्फ इतना सा है कि जिन प्रशासनिक निर्णयो से समाज के आम श्रावक आहत है उनके इस दर्द का ईलाज हो और समाज दलबन्दी की सियासत,और कुछ लोगों के उस शिकंजे से मुक्त हो जिनको आम लोग पसंद नहीं करते।
मेरा पुर जोर निवेदन है कि श्री सुर्रेन्दर सुराणा(सिरियारी) के बनवास को खत्म करने का तुरन्त न सिर्फ ऐलान हो बल्कि उनके दुआरा सामाजिक सक्रियता व् सिरियारी को चमन बनाने की भूमिका को फिर से स्मरण करते हुए उत्साह,व् अभिनन्दन के साथ उनकी घर वापसी हो।
मेरे पास जितने भी सन्देश देश भर के श्रद्धावान श्रावक वर्ग से आये है उनमे कुछ मुनियो पर एक स्वर में आरोप लगे है--विसंगतियों के वे जिम्मेदार बताये जा रहे है और समाज के कुछ लोगो की मिली भगत से विसंगतियों का पोषण हो रहा है--
मेरा निवेदन है कि संघ पुरुष बड़े साधक तो है पर अब वक्त उनके कड़े प्रशासक होने की मांग कर रहा है।
एक बार सबको सुधरने का अवसर कड़ी चेतावनी के साथ दे और फिर भी न समझे तो बाहर का रस्ता दिखाए।
मेरा निवेदन है कि धर्म संघ में साधको की संख्या बढ़ाने की दौड़ खत्म हो उनकी गुणवत्ता पर ध्यान मुख्य हो।
हमारे संघ पुरुष पर अगर कुछ अवांछित तत्वों का दबाब हो तो समाज की जिम्मेदारी बनती है ऐसे लोगो को खुल कर बेनकाब करे।
हमारी प्राथमिकता हमारे संघ पति को शारीरिक,मानसिक दबाब से मुक्त रखने की है ।
हमारे धर्म संघ में मंत्री मुनि जैसे अनुभवी कोहिनूर है और महेंद्र मुनि व् ऐसे अनको साधु-साध्वियों की कतार भी है जिन पर धर्म संघ को नाज है उनसे बेहतर आचार्य श्री के लिए और कोई परामर्शक नहीं हो सकता।
एक बात और अगर आचार्य श्री महाश्रमण जी का सटीक जन्म विवरण उपलब्ध हो तो मुझ तक पहुंचाए--यह विवरण मंत्री मुनि के पास उपलब्ध हो सकता है।
मेरे किसी भी पत्र को कोई व्यक्ति विशेष पर केंद्रित न समझा जाये और न ही मुझे उपदेशक की कतार में खड़ा किया जाये।
एक पत्रकार की सीमित भूमिका में ये पत्र असीमित भूमिका अदा कर सकते है अगर आम जन मानस मेरी भावनाओं से सहमत हो।
शुभकामनाये और आभार
संजय सनम
संपादक फर्स्ट न्यूज़
संपर्क सूत्र-7278027381
तो कुछ फोन व् सन्देश ने मुझे यु टर्न लेने का उलाहना भी दिया और यहाँ तक कहा कि आपके पिछले सन्देश एक नयी सम्भावना व् हौसले को जता रहे थे पर कल के सन्देश ने हमे निराश किया कि आप ने उस सच,और आक्रोश के अंदाज को यू टर्न देकर उस प्रवाह को ही रोक दिया।
पाठक के विचार और उनकी प्रतिक्रियाएं ही लेखक का संबल होती है -आप अगर अपनी प्रतिक्रिया से मेरी कलम में उत्साह का संचार भी करते है तो आपको हक है अपनी निराशा व् आलोचना व्यक्त करने का।
मेरे दिल में दोनों प्रतिक्रियाओं के लिए सम्मान है और आपकी भावनाओ को समझने व् आपकी जिज्ञासा का समाधान देने की मेरी जिम्मेदारी बनती है--आज का यह पत्र आपको यह विश्वास दिलाने के लिए ही है कि मै मूलतः विषय से हटा नहीं हूँ और न ही मेरा अंदाज बदला है--हां विषय विसंगतियों के महत्वपूर्ण है पर आचार्य श्री महाश्रमण जी के मानसिक,शारीरिक रूप से पर्दे के पीछे अगर कोई ऐसा षड्यंत्र चल रहा हो --और कुछ लोग बड़े विश्वास से पुर जोर आवाज़ में कह रहे हो तो संघपति की सुरक्षा उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है इसका अर्थ यह नहीं समझे कि मेने यू टर्न ले लिया है--आज तक के मेरे लेखन पर न तो धमकियों से डरने का व् न ही दौलत के तराजू में बिकने का दाग है।इसलिए आप निश्चिन्त रहे-मै तब तक कलम की धार पैनी चलाता रहूँगा जब तक आम जन सामान्य मुझे इसकी स्वीकृति देगा।
स्नेही जनो के परामर्श पर मेरी हर पोस्ट अब केम्प ऑफिस की मेल में भी जा रही है।
मेरा लक्ष्य किसी पर प्रहार नहीं बल्कि विसंगतियों पर प्रहार है और आम जन सामान्य की आवाज के सवाल है।
मेरा लक्ष्य यह भी नहीं कि मै आमने सामने संघपति से बात करू और उनसे ये कड़वे सवाल करू।
मेरा लक्ष्य सिर्फ इतना सा है कि जिन प्रशासनिक निर्णयो से समाज के आम श्रावक आहत है उनके इस दर्द का ईलाज हो और समाज दलबन्दी की सियासत,और कुछ लोगों के उस शिकंजे से मुक्त हो जिनको आम लोग पसंद नहीं करते।
मेरा पुर जोर निवेदन है कि श्री सुर्रेन्दर सुराणा(सिरियारी) के बनवास को खत्म करने का तुरन्त न सिर्फ ऐलान हो बल्कि उनके दुआरा सामाजिक सक्रियता व् सिरियारी को चमन बनाने की भूमिका को फिर से स्मरण करते हुए उत्साह,व् अभिनन्दन के साथ उनकी घर वापसी हो।
मेरे पास जितने भी सन्देश देश भर के श्रद्धावान श्रावक वर्ग से आये है उनमे कुछ मुनियो पर एक स्वर में आरोप लगे है--विसंगतियों के वे जिम्मेदार बताये जा रहे है और समाज के कुछ लोगो की मिली भगत से विसंगतियों का पोषण हो रहा है--
मेरा निवेदन है कि संघ पुरुष बड़े साधक तो है पर अब वक्त उनके कड़े प्रशासक होने की मांग कर रहा है।
एक बार सबको सुधरने का अवसर कड़ी चेतावनी के साथ दे और फिर भी न समझे तो बाहर का रस्ता दिखाए।
मेरा निवेदन है कि धर्म संघ में साधको की संख्या बढ़ाने की दौड़ खत्म हो उनकी गुणवत्ता पर ध्यान मुख्य हो।
हमारे संघ पुरुष पर अगर कुछ अवांछित तत्वों का दबाब हो तो समाज की जिम्मेदारी बनती है ऐसे लोगो को खुल कर बेनकाब करे।
हमारी प्राथमिकता हमारे संघ पति को शारीरिक,मानसिक दबाब से मुक्त रखने की है ।
हमारे धर्म संघ में मंत्री मुनि जैसे अनुभवी कोहिनूर है और महेंद्र मुनि व् ऐसे अनको साधु-साध्वियों की कतार भी है जिन पर धर्म संघ को नाज है उनसे बेहतर आचार्य श्री के लिए और कोई परामर्शक नहीं हो सकता।
एक बात और अगर आचार्य श्री महाश्रमण जी का सटीक जन्म विवरण उपलब्ध हो तो मुझ तक पहुंचाए--यह विवरण मंत्री मुनि के पास उपलब्ध हो सकता है।
मेरे किसी भी पत्र को कोई व्यक्ति विशेष पर केंद्रित न समझा जाये और न ही मुझे उपदेशक की कतार में खड़ा किया जाये।
एक पत्रकार की सीमित भूमिका में ये पत्र असीमित भूमिका अदा कर सकते है अगर आम जन मानस मेरी भावनाओं से सहमत हो।
शुभकामनाये और आभार
संजय सनम
संपादक फर्स्ट न्यूज़
संपर्क सूत्र-7278027381
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