अब तक के पत्रों में मैंने धर्म संघ के अंदर के उन हालातों पर आम जन मानस की आवाज़ को रखा था-और तीन दिन से देश के विभिन्न क्षेत्रों से तेरापंथ समाज के आम श्रद्धा वान श्रावक वर्ग के फोन व् संदेशो का दौर बना हुआ है-कल आये 3 फोन कॉल ने मुझे जिस विश्वास के साथ एक प्रबल आशंका आचार्य श्री महाश्रमण जी पर तांत्रिक अभिचार की जताई उससे मै आज उनकी सुरक्षा व् सतर्कता के लिए लिखने को मजबूर हुआ हूँ।
आचार्य श्री के निर्णय व् पद्धति पर मेरे सवाल लाख हो सकते है पर उससे भी ऊपर उनकी सुरक्षा का सवाल मेरे लिए अहम है और इसके लिए आज तेरापंथ समाज के श्रावक समाज से अनुरोध है कि हमारे लिए हमारे गुरु के स्वास्थ्य की सुरक्षा अहम है क्योकि मै स्वयं ज्योतिष विद्या की राह का पथिक हूँ और मुझे मालूम है कि तांत्रिक प्रक्रिया से क्या कुछ हो सकता है?
मुझे मालूम है कि आचार्य श्री स्वयं साधक,आराधक है पर इनकी साधना आत्मकल्याण की है और ये सात्विक साधना है ।तांत्रिक क्रिया में अभिचार कर्म से जो तामसिक साधना होती है वो सात्विक पर भारी पड़ती है जिस तरह से देव पर असुर भारी पड़ते है।
अपने गुरु के प्रति वास्तविक आस्था रखने वाले कुछ लोगों ने यह आशंका जताई है कि उनके गुरु कुछ ऐसे घेरे में घिरे हुए है जो अपना मन मर्जी का कुछ भी करवाने के लिए इस स्तर तक भी गिर सकते है।उनकी अपील थी मुझसे कि आप अपनी कलम से इस आशंका को उठाइये और हमारे गुरु की सुरक्षा पर धर्म संघ के वास्तविक साधू साध्वी समाज और वास्तविक आस्थावान ,गुरु को जी जान से चाहने वाले श्रावक समाज को जगाइए।
मुझे इनकी भावना सही लगी और मेरे लिए भी मेरे सवालो से अधिक आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुरक्षा है-क्योकि मे अभिचार कर्म की शक्ति को मानता हूँ-तामसिक शक्तियां कलियुग में अधिक प्रभावी होती है।
एक शांत,साधक पर इसका प्रभाव वैसे ही पड़ता है जैसे देव शक्ति पर असुर शक्ति का।
संघपति से मेरे सवाल लाख हो सकते है--प्रशासनिक पद्धति पर विरोध लाख हो सकता है पर मेरे लिए उनकी सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मेरा निवेदन है कि समाज दिखावटी गरिमा और मर्यादा से बाहर आये और इस बात का गंभीरता से चिंतन करे कि उनके गुरु पर किसी तरह के वशीकरण ,उच्चाटन शक्तियो का प्रयोग तो नहीं हुआ -अगर इस पत्र की यह सम्भावना सच लगे तो फिर खुल कर आ जाये क्योकि संघ पति की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है।
आशा है विषय की गंभीरता को सम्पूर्ण श्रावक समाज अति गंभीरता से समझेगा और तुरन्त इस पर चिंतन करेगा।
जब से मैंने यह आशंका की बात सुनी है अब मेरे सवाल पीछे छुट गए है -मेरे लिए सबसे पहले गुरु को उस घेरे से मुक्त करना है जो अपने स्वार्थ के लिए उनका गलत उपयोग कर रहे है।
अगर यह आशंका सच है तब तमाम विसंगतियों की जड़ यही है और इसका समाधान खोजिए।
अगर यह आशंका सच है तब चेत जाइये क्योकि हमारे गुरु अभिचारी शक्तियों के घेरे में है अर्थात खतरे में है।
मुझे विश्वास है कि वास्तविक आस्था वाले लोग अब देर नहीं करेंगे और दिखावटी -बनावटी आस्था वाले लोग अब सोचने के लिए मजबूर हो जायेंगे।
एक बात मै फिर से जोर देकर लिखना चाहूँगा कि ज्योतिष की राह का पथिक होने की वजह से मेरे लिए यह विषय गंभीर है और इसलिए आज मैंने तमाम उन सवालो को छोड़ दिया है जो एक पत्रकार के राडार पर होते है।
आज मेरे लिए आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुरक्षा का सवाल सबसे अहम है और आज पत्रकार की भूमिका में नहीं वरन् मन की उस चाह की भूमिका में हूँ जो महाश्रमण जी पर इस तरह के प्रहार को कतई सहन नहीं कर सकता।
मेरे पास अंधी आस्था और समर्पण नहीं है पर जो अंदर का है उसे बाहर दिखाने की जरूरत भी नहीं है और न ही किसी से मुझे प्रमाणपत्र लेना है।
आभार।
संजय सनम
संपादक फर्स्ट न्यूज़
संर्पक सूत्र--7278027381
आचार्य श्री के निर्णय व् पद्धति पर मेरे सवाल लाख हो सकते है पर उससे भी ऊपर उनकी सुरक्षा का सवाल मेरे लिए अहम है और इसके लिए आज तेरापंथ समाज के श्रावक समाज से अनुरोध है कि हमारे लिए हमारे गुरु के स्वास्थ्य की सुरक्षा अहम है क्योकि मै स्वयं ज्योतिष विद्या की राह का पथिक हूँ और मुझे मालूम है कि तांत्रिक प्रक्रिया से क्या कुछ हो सकता है?
मुझे मालूम है कि आचार्य श्री स्वयं साधक,आराधक है पर इनकी साधना आत्मकल्याण की है और ये सात्विक साधना है ।तांत्रिक क्रिया में अभिचार कर्म से जो तामसिक साधना होती है वो सात्विक पर भारी पड़ती है जिस तरह से देव पर असुर भारी पड़ते है।
अपने गुरु के प्रति वास्तविक आस्था रखने वाले कुछ लोगों ने यह आशंका जताई है कि उनके गुरु कुछ ऐसे घेरे में घिरे हुए है जो अपना मन मर्जी का कुछ भी करवाने के लिए इस स्तर तक भी गिर सकते है।उनकी अपील थी मुझसे कि आप अपनी कलम से इस आशंका को उठाइये और हमारे गुरु की सुरक्षा पर धर्म संघ के वास्तविक साधू साध्वी समाज और वास्तविक आस्थावान ,गुरु को जी जान से चाहने वाले श्रावक समाज को जगाइए।
मुझे इनकी भावना सही लगी और मेरे लिए भी मेरे सवालो से अधिक आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुरक्षा है-क्योकि मे अभिचार कर्म की शक्ति को मानता हूँ-तामसिक शक्तियां कलियुग में अधिक प्रभावी होती है।
एक शांत,साधक पर इसका प्रभाव वैसे ही पड़ता है जैसे देव शक्ति पर असुर शक्ति का।
संघपति से मेरे सवाल लाख हो सकते है--प्रशासनिक पद्धति पर विरोध लाख हो सकता है पर मेरे लिए उनकी सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मेरा निवेदन है कि समाज दिखावटी गरिमा और मर्यादा से बाहर आये और इस बात का गंभीरता से चिंतन करे कि उनके गुरु पर किसी तरह के वशीकरण ,उच्चाटन शक्तियो का प्रयोग तो नहीं हुआ -अगर इस पत्र की यह सम्भावना सच लगे तो फिर खुल कर आ जाये क्योकि संघ पति की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है।
आशा है विषय की गंभीरता को सम्पूर्ण श्रावक समाज अति गंभीरता से समझेगा और तुरन्त इस पर चिंतन करेगा।
जब से मैंने यह आशंका की बात सुनी है अब मेरे सवाल पीछे छुट गए है -मेरे लिए सबसे पहले गुरु को उस घेरे से मुक्त करना है जो अपने स्वार्थ के लिए उनका गलत उपयोग कर रहे है।
अगर यह आशंका सच है तब तमाम विसंगतियों की जड़ यही है और इसका समाधान खोजिए।
अगर यह आशंका सच है तब चेत जाइये क्योकि हमारे गुरु अभिचारी शक्तियों के घेरे में है अर्थात खतरे में है।
मुझे विश्वास है कि वास्तविक आस्था वाले लोग अब देर नहीं करेंगे और दिखावटी -बनावटी आस्था वाले लोग अब सोचने के लिए मजबूर हो जायेंगे।
एक बात मै फिर से जोर देकर लिखना चाहूँगा कि ज्योतिष की राह का पथिक होने की वजह से मेरे लिए यह विषय गंभीर है और इसलिए आज मैंने तमाम उन सवालो को छोड़ दिया है जो एक पत्रकार के राडार पर होते है।
आज मेरे लिए आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुरक्षा का सवाल सबसे अहम है और आज पत्रकार की भूमिका में नहीं वरन् मन की उस चाह की भूमिका में हूँ जो महाश्रमण जी पर इस तरह के प्रहार को कतई सहन नहीं कर सकता।
मेरे पास अंधी आस्था और समर्पण नहीं है पर जो अंदर का है उसे बाहर दिखाने की जरूरत भी नहीं है और न ही किसी से मुझे प्रमाणपत्र लेना है।
आभार।
संजय सनम
संपादक फर्स्ट न्यूज़
संर्पक सूत्र--7278027381
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