इस पोस्ट को पढ़ने से दुःख,आक्रोश की अनुभूति हुई।
पहले भी क्या दर्द कम थे इस आशियाने में--
कि एक और बगीचे पर कयामत आ गई---
तेरापंथ युवक परिषद के मेरे जोशीले साथियो---
पता नहीं क्यों?
मुझे यह लग रहा है कि आपके निश्चल समर्पण, आपके दुआरा सक्रियता से किये गए कार्य ,आप सबकी एकता,सद्भावना की यह शक्ति आचार्य भिक्षु की नजर में जरूर है और आपके अधिकार की रक्षा अवश्य होनी है।
मै सियासत और उसकी हरारत की बात नहीं करूँगा पर मुझे इतना विश्वास है कि आम श्रावक की गुड लिस्ट में तेरापंथ युवक परिषद कोलकाता है---और आपकी शक्ति को विभाजित करने का मतलब आम श्रावक के मन में उबाल लाने की कोशिश करना है---
अगर आम श्रावक खड़ा हो गया तब तमाम सियासत की दीवारें ढह जायेगी और यह बात फिर दूर तक जायेगी।
इसलिए मुझे लगता है कि यह निर्णय वापिस होगा क्योंकि मुझे विश्वास है आचार्य श्री महाश्रमण अपनी युवा आदर्श फ़ौज के हौसले को तोड़ने के निर्णय को स्वयं पलटेंगे।
यह पत्र आपके दर्द को परिभाषित करता है-
हां एक बात मै अवश्य कहुंगा कि हमको अपने पत्र में किसी के भी व्यक्तिगत नाम को इंगित करने से बचना चाहिए क्योंकि जो पत्र बिना नाम दिए संकेतों से अपनी बात बता जाये वो आदर्श पत्र होता है।
हमारा विरोध व्यक्तिशः किसी से नहीं होना चाहिए-सैद्धान्तिक हो सकता है।
इसलिए किसी का भी नाम से उल्लेख सार्वजनिक पोस्ट में तब तक न करे जब तक आप मजबूरी की हद तक न पहुँच जाए।
मुझे विश्वास है आचार्य भिक्षु का सही वक्त पर सही निर्देश उपयुक्त माध्यम तक अवश्य जाएगा और कोलकाता सहित सभी तेयुप को विभाजन से बचाएगा
शुभकामनाओ के साथ
आभार।
संजय सनम
संपादक फर्स्ट न्यूज़
संर्पक सूत्र-7278027381
पहले भी क्या दर्द कम थे इस आशियाने में--
कि एक और बगीचे पर कयामत आ गई---
तेरापंथ युवक परिषद के मेरे जोशीले साथियो---
पता नहीं क्यों?
मुझे यह लग रहा है कि आपके निश्चल समर्पण, आपके दुआरा सक्रियता से किये गए कार्य ,आप सबकी एकता,सद्भावना की यह शक्ति आचार्य भिक्षु की नजर में जरूर है और आपके अधिकार की रक्षा अवश्य होनी है।
मै सियासत और उसकी हरारत की बात नहीं करूँगा पर मुझे इतना विश्वास है कि आम श्रावक की गुड लिस्ट में तेरापंथ युवक परिषद कोलकाता है---और आपकी शक्ति को विभाजित करने का मतलब आम श्रावक के मन में उबाल लाने की कोशिश करना है---
अगर आम श्रावक खड़ा हो गया तब तमाम सियासत की दीवारें ढह जायेगी और यह बात फिर दूर तक जायेगी।
इसलिए मुझे लगता है कि यह निर्णय वापिस होगा क्योंकि मुझे विश्वास है आचार्य श्री महाश्रमण अपनी युवा आदर्श फ़ौज के हौसले को तोड़ने के निर्णय को स्वयं पलटेंगे।
यह पत्र आपके दर्द को परिभाषित करता है-
हां एक बात मै अवश्य कहुंगा कि हमको अपने पत्र में किसी के भी व्यक्तिगत नाम को इंगित करने से बचना चाहिए क्योंकि जो पत्र बिना नाम दिए संकेतों से अपनी बात बता जाये वो आदर्श पत्र होता है।
हमारा विरोध व्यक्तिशः किसी से नहीं होना चाहिए-सैद्धान्तिक हो सकता है।
इसलिए किसी का भी नाम से उल्लेख सार्वजनिक पोस्ट में तब तक न करे जब तक आप मजबूरी की हद तक न पहुँच जाए।
मुझे विश्वास है आचार्य भिक्षु का सही वक्त पर सही निर्देश उपयुक्त माध्यम तक अवश्य जाएगा और कोलकाता सहित सभी तेयुप को विभाजन से बचाएगा
शुभकामनाओ के साथ
आभार।
संजय सनम
संपादक फर्स्ट न्यूज़
संर्पक सूत्र-7278027381
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