Siyasat

यह  कैसी  सियासत हैं ?

सियासत  को  साफ़ सुथरा  रखने  की  बात   करने  वाले  सिर्फ  बाते  ही करते  दिखते  है  क्योकि  अगर  वास्तव  में कुछ  करना  होता  तब   उम्मीदवार  के  चयन  में  भी  कुछ  आचार  विचार  रख  लेते ,कम से  कम दागी  उम्मीदवार  तो  जनता के सामने प्रस्तुत  नहीं  करते !

अजब  रंग  है इस सियासत का जो  जनता में हरारत कर रही है -वोट बैंक के लिए शरारत कर रही है है 
सच पूछिये तो सेवा के नाम से जनता पर कयामत कर रही है !


क्या स्वच्छ  चरित्र  वाले उम्मीदवार नहीं है सियासत वाली पार्टियों के पास ? या फिर गुंडई से ही चुनाव जितने को परंपरा का निर्वाह कर रही है सियासत ?

जनता जब तक इनको कड़ा पैगाम नहीं दे देती तब तक ये अपने करीब नहीं बदलेंगे ------इसलिए मतदाता को हो अपना मिजाज बदलना पड़ेगा तब जाकर ये सुधरेगे !

मतदाताओ की जबाबदेही सिर्फ  मतदान की ही नहीं है बल्कि परख कर सही व्यक्ति को प्रतिनिधि बनाने की है. ------


आखिर कब तक विधान सभा, लोक सभा में  दबंगई  ,गुंडई  नृत्य करती रहेगी ?

इस लिए जनता को जगना होगा व् बदलाव करना होगा !


संजय सनम 

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